#विशेष2019: Zomato, Byjus, OYO जैसे स्टार्टअप्स ने एक साल में हासिल किया ₹32200 करोड़ का निवेश

  • by Ashutosh Kumar Singh
  • March 14, 2019

भारतीय स्टार्टअप तंत्र निवेश से लेकर विस्तार तक सबमें अपना परचम लहरा रहा है। और यह बात महज़ कहने की नहीं है, बल्कि आंकडें भी इस बात को बेहतर ढंग से बयाँ करते हैं। 

दरसल EY एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में निवेशकों ने भारतीय स्टार्टअप्स ने करीब $7 बिलियन का निवेश जुटाया था। इस रिपोर्ट में कुछ चुनिंदा स्टार्टअप जैसे Zomato, OYO, Swiggy, Byjus, Paytm Mall, Udaan, Policybazaar और Curefit जैसे स्टार्टअप ने ही 2018 में कुल $4.6 बिलियन (करीब 32200 करोड़ रुपये) का निवेश अर्जित किया। 

इस बीच कुछ बड़े सौदे भी दर्ज किये गये जैसे वॉलमार्ट (Walmart) द्वारा फ्लिपकार्ट (Flipkart) का अधिग्रहण, अलीबाबा (Alibaba) द्वारा बिगबास्केट (BigBasket) और पेटीएम (Paytm) में निवेश इत्यादि। 

यहाँ तक कि अब Ola, Swiggy और Zomato जैसे स्टार्टअप एक एक बार में $1 बिलियन तक का निवेश अर्जित कर रहें हैं। 

भारतीय निवेशकों से ज्यादा बाहरी निवेशक जता रहें हैं देश के स्टार्टअप्स में भरोसा

इस बीच इस बात में कोई दोहराय नहीं है कि भारतीय निवेशकों की भागीदारी और दिलचस्पी देश के स्टार्टअप में अवश्य ही बढ़ी है, लेकिन आज भी अधिकांश रूप से देखा जाए तो बाहरी निवेश कहीं अधिक फंडिंग दे रहे हैं और देने को भी तैयार है। 

इस बीच भारतीय ऑनलाइन ई-कॉमर्स क्षेत्र भी तेजी से विस्तार करता नज़र आ रहा है। बात ऑनलाइन फ़ूड सेक्टर की करें या कैब सेवाओं की, देश के स्टार्टअप दोनों क्षेत्रों में तेज़ी से निवेश अर्जित कर अपना विस्तार करते नज़र आ रहें हैं।

क्लाउड-किचन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्र भी आने वाले समय में जुड़ सकतें हैं मुख्य धारा से

वर्तमान बाज़ार के साथ ही साथ भारतीय स्टार्टअप जगत में भविष्य की संभवनाओं को लेकर भी स्पष्टता दिखाई देने लगी है। आने वाले समय में देश में क्लाउड-किचन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी तकनीकों और नवचारों से स्टार्टअप तंत्र और बड़ा होता न नज़र आ सकता है। 

जैसे हाल ही में ही हमनें अपनी ही एक रिपोर्ट में यह बताया था कि Uber के संस्थापक और पूर्व सीईओ, ट्रैविस अपने नए उद्यम सिटी स्टोरेज सिस्टम्स (City Storage Systems, जिसे पहले ‘क्लाउड-किचन’ के नाम से जाना जाता था) को भी भारत में पेश करने को लेकर विचार कर रहे हैं। 

खैर! भारतीय बाज़ार स्टार्टअप तंत्र और उपभोगता दोनों लिहाज़ से संभवनाओं से भरा हुआ है। और इस बात का अंदाज़ा निवेशकों और स्टार्टअप दोनों पक्षों को है। देखना सिर्फ़ यह है कि यह दोनों पक्ष इन संभावनाओं को किस हद तक वास्तविकता में बदलनें में कामयाब हो पातें हैं? 

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं
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