July 13, 2020
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लॉकडाउन की वजह से करीब 7 लाख छोटे दुकानों पर लटका ताला

इस कोरोना के महाकाल ने सभी का जीना बेहाल कर दिया है। इंसान से लेकर कंपनियां यहां तक की छोटे खुदरा दुकानों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा है। उपभोक्ता के सामानों की बिक्री करने वाली कंपनियों का दावा है कि क़रीब 6 लाख किराना दुकानें इस लॉकडाउन की वज़ह से बंद हो गई है। यह भी आशंका है कि आगे आने वाले समय में यह न खुलें। इसके पीछे वजह बताई जा रही है लोगों पैसों की तंगी के कारण अपने अपने गांवो और घरों को लौटना।

ऑल इंडिया मोबाईल रिटेलर एसोसिएशन के अनुसार 150,000 स्टोर के करीब 60 प्रतिशत दुकानें जो स्मार्टफ़ोन की बिक्री करती है वो गैर जरूरी सामानों के खुलने के आदेश के बावजूद बंद पड़े हुए है। इंडस्ट्री के लोगों का कहना है कि छोटे और खुदरा विक्रेताओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और जो वितरक है वो नगद में ही कारोबार कर रहे है। पहले को तरह उन्हें 7 से 21 दिन का ऋण भी नहीं मिल पा रहा है। इंडस्ट्री को डर है कि इस बंद की वजह से बाजारों के ठीक होने में और भी वक़्त लग सकता है।

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार पारले प्रोडक्ट्स ने कहा कि अप्रैल और मई के महीने में 58 लाख छोटे किराना दुकानों का 10 प्रतिशत हिस्सा जो कि रोड के किनारे चाय, पान और जरूरतों के सामान बेचा करता था वो बंद हो चुके है। पारले कैटेगरी हेड बी कृष्ण राव ने अपने बयान में कहा कि वितरकों ने इन आउटलेट्स के बंद होने कारण अपने पैसे भी खो दिए है।

राव ने अपने बयान में यह भी कहा कि इसमें से ज्यादातर दुकानें हमेशा के लिए बंद हो चुकी है। 42 लाख बड़े किराना दुकानों में से 1-2 प्रतिशत दुकानें भी बंद हो चुकी है। इसके पीछे का कारण मालिकों का अपने घर और अपने अपने गांवों की तरह चले जाना बताया जा रहा है। यह सिलसिला अभी 5-6 महीने तक जारी रहने वाला है। उन्होंने कहा कि हालांकि यह फिर खुल सकते है फिर भी छोटी किराना दुकानें बंद होने से कंपनियों की पहुंच पर काफी फर्क पड़ा है।

Britannia इंडस्ट्रीज के मैनेजिंग डायरेक्टर वरुण बैरी ने कहा कि स्टोर बंद होने का एक बड़ा हिस्सा अस्थाई है जो बाद में लॉकडाउन के खुलते ही धीरे धीरे खुल जाएगा। कुछ दुकानों पर हमेशा के लिए असर पड़ा है जो अब शायद आगे आने वाले समय में न खुलें। Godrej कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के भारत और सार्क देशों के सीईओ सुनील कटारिया ने भी कहा कि दुकानों का बंद होना एक अस्थाई प्रक्रिया है जो आगे आने वाले समय में ठीक हो जाएगा चाहें यह अवधि कितना ही अनिश्चित क्यों न हो? उन्होंने यह भी कहा कि दुकानों का फिर से खुलना कोरोना महामारी के प्रकोपों को नियंत्रित करने वाली कारकों और इससे सुरक्षा और श्रमिकों की उपलब्धता पर ही यह पूर्णतः निर्भर करेगा।

भारत में करीब किराना और अन्य तेज़ी से चलने वाली उपभोक्ता सामानों की बिक्री करने वाले लगभग 10-12 मिलियन छोटे रिटेल आउटलेट्स है। लेकिन बड़ी संख्या में यह विभाजित है।

AIMRA के प्रेसिडेंट अरविंदर खुराना ने कहा कि, स्मार्टफोन बाजारों में कुछ स्टोर के मालिकों को पैसों की काफ़ी दिक्कत हुई और 15,000 रुपए के सेगमेंट में ब्रांडों से बेहद कम आपूर्ति का भी सामना करना पड़ा। इसके पीछे उपभोक्ताओं के पास पैसे की कमी भी एक मुख्य कारण है। उन्होंने यह भी कहा कि इन सारी चुनौतियों के बीच परिचालन लागत दोगुनी से भी अधिक हो गई है जिससे कई सारे हजारों स्टोर स्थायी रूप से बंद हो सकते है।

स्मार्टफोन ट्रैकर IDC इंडिया के रिसर्च डायरेक्टर नवकेंदर सिंह ने अपने बयान में कहा कि कुछ स्टोर बंद हो जायेंगे। हालांकि हैंडसेट कंपनियां को छोटे शहरों में स्टोर का हौसला बढ़ाना चाहिए जहां भी पैठ कम है इससे उन कंपनियों का ही फायदा होगा।

एक आकलन के अनुसार भारत में 62 प्रतिशत स्मार्टफ़ोन की बिक्री के लिए इन स्टोर शॉपिंग मौजूद है। FMCG में इंडस्ट्री सेल्स के कुल मूल्यों का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा किराना स्टोरों का है। सेल्स ट्रैकर नील्सन के अनुसार, पिछले साल के मुकाबले अप्रैल के महीने में FMCG इंडस्ट्री के वृद्धि दर में करीब 34 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज़ की गई है। इसी वजह से छोटे स्टोरों की बिक्री में भी 38 प्रतिशत तक की गिरावट आई है जिसमें से पहले पड़े पैमाने पर आधुनिक व्यापार विकास दर 5 प्रतिशत से भी अधिक हुआ करती थी जो अब काफी कम है।

नील्सन के मुताबिक़ पिछले साल के मुकाबले महानगरों के भीतर पारंपरिक व्यापार के योगदान में जनवरी से मार्च तक के तिमाही के दौरान 73 प्रतिशत से गिरकर 68 प्रतिशत तक जा पहुंचा है।

फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरेन शाह, जो कि महाराष्ट्र में करीब 350,000 से अधिक दुकानों का प्रतिनिधित्व करते है उन्होंने कहा कि दुकानदार यात्रा के लिए स्थानीय परिवहन का उपयोग नहीं कर सकते है, अधिकांश किराने की दुकानों पर भी किराए का बोझ है। उन्होंने यह भी कहा कि निश्चित लागत, वितरण सम्बन्धी बाधाएं और अपने कर्मचारियों के चले जाने के परिणामस्वरूप आगे आने वाले समय में दुकानों को बंद कर दिया जाएगा।

आने वाले समय में अब देखना यह है कि कैसे हालात सुधरते है और किस तरह से किराना और स्मार्टफोन कि दुकानों को फ़ायदा होता है। इस महामारी ने सभी को एक स्थिर अवस्था में ला खड़ा किया है। आगे आने वाले वक्त में इससे उबरने में काफी समय भी लग सकता है।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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