अमेज़न इंडिया ने विक्रेताओं के लिए लिस्टिंग शुल्क और लॉजिस्टिक्स शुल्क में की वृद्धि

  • by Yogesh
  • April 29, 2019

ई-कॉमर्स (E-commerce) कमंनी अमेज़न (Amazon) ने भारत में अपने व्यापारिक मार्जिन में सुधार करने के लिए  अपने उत्पाद श्रेणियों में बदलाब लाने के लिए अपने विक्रेता आयोगों को बदल रहा है।

बता दें कि ई-कॉमर्स (E-commerce) मार्केटप्लेस अमेज़न (Amazon) ने बिजली के सौदों को बढ़ावा देने और प्रति विक्रेता 1 लाख से अधिक आइटम की सूची देने और लॉजिस्टिक शुल्क पर शुल्क बढ़ाने का फैसला लिया है।

इतना ही नहीं अमेज़न (Amazon) ने घड़ियों,  जूते, सौंदर्य उत्पाद और मोबाइल फोन पर अपने कमीशन में वृद्धि की है,  जबकि अमेज़न (Amazon) ने खेल के सामान, फैशन ज्वैलरी, हैंडबैग और संगीत वाद्ययंत्र, सहित  अन्य सामानों पर कमीशन कम किया है।  बता दें कि वर्तमान में, अमेज़न (Amazon) 3% से 25% के बीच कमीशन लेता है। लेकिन अब 23 मई से अपनी परिवर्तित श्रेणियों के बीच 0.5% और 2% के बीच कमीशन में वृद्धि कर रहा है।

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अमेज़न (Amazon) इंडिया में विक्रेता सेवाओं के उपाध्यक्ष गोपाल पिल्लई ने इस बारे में जानकारी देते हुए ईटी का हवाला देते हुए बताया कि “व्यावसायिक संरचना परिवर्तन मुद्रास्फीति को ध्यान में रखते हुए हम विक्रेताओं के फीडबैक लेने के बाद ये बदलाव कर रहे हैं,

गौरतलब है कि अमेज़न (Amazon) के पास भारत में अपने मंच पर 150 मिलियन से अधिक उत्पादों की पेशकश करने वाले 4.5 लाख से अधिक विक्रेता हैं। वर्तमान में मार्केटप्लेस पर विक्रेता प्रति ऑर्डर, रेफरल शुल्क और अलग से शिपिंग लागत, मासिक वेयरहाउसिंग शुल्क और पूर्ति के मोड के अनुसार पिक एंड पैक शुल्क का भुगतान करते हैं।

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बता दें कि इससे पहले मार्च में, ई-कॉम (E-commerce) फर्म फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने वेस्टर्न वियर, कुर्तियां, इनरवियर, स्मार्टवॉच, ब्लेज़र और कपरकोट पर कमीशन शुल्क बढ़ा दिया था। फ्लिपकार्ट (Flipkart) ने इन उत्पादों पर 6.5% से 15% तक कमीशन में बृद्धि की थी।

बता दें कि आज कल सभी ई-कॉम (E-commerce)  मार्केटप्लेस अपने व्यापार मार्जिन में सुधार करने के लिए संरचनात्मक परिवर्तनों के माध्यम से व्यापार का विस्तार करने की कोशिश कर रहे हैं।

वहीं ई कॉमर्स (E-commerce) कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए  कमीशन को लेकर अभी तक विक्रेताओं की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं इस मामले में निरीक्षण करने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि ई कॉमर्स (E-commerce) कंपनियों के द्वारा कमीशन बढ़ाने के कारण विक्रेताओं को पीछे हटना पड़ सकता है।

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