साइबर हमलों के सर्वाधिक प्रभावित देशों में भारत दूसरे स्थान पर: रिपोर्ट

वर्तमान समय में साइबर सिक्यूरिटी का मूद्दा हर एक देश और संस्थान के लिए सबसे अहम होता जा रहा है। बढ़ते हैकिंग और अन्य प्रकार के साइबर हमलें डाटा के साथ ही साथ प्रत्यक्ष तौर पर पैसों को लेकर भी काफ़ी हानि पहुँचाते हैं।

और अब नई डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 से 2018 के बीच भारत दूसरा सबसे अधिक साइबर हमला प्रभावित देश रहा है।

इसके साथ ही 2017 के बाद से भारत में डेटा ब्रीच की औसत लागत 7.9% बढ़ी है। और हैरान और परेशान करने वाली बात यह है कि प्रति ब्रीच रिकॉर्ड की औसत लागत 4,552 रूपये अनुमानित की गई है।

दरसल इन बढ़ते साइबर हमलों के कारण अधिक से अधिक कंपनियां साइबर बीमा पॉलिसियों के जरिए साइबर-ब्रीच जोखिम को कम करने का प्रयास कर रही हैं।

इन पर अगर दिलचस्प आंकड़ों की बात करें तो 2018 तक लगभग 350 साइबर बीमा पॉलिसी अकेले भारत में बेची गई हैं। यह आँकड़ा 2017 की तुलना में 40% अधिक है।

इसके साथ ही जबकि आईटी, बैंकिंग और वित्तीय सेवा क्षेत्र काफी समय पहले से ही साइबर बीमा को लेकर प्रयासरत दिख रहें हैं। वहीँ अब इसके जोख़िम को देखते हुए विनिर्माण, दवा, खुदरा, हॉस्पिटैलिटी, रिसर्च और ने क्षेत्रों में भी साइबर सुरक्षा समाधानों की मांग तेजी से बढ़ रही है।

यह सही भी है, क्यूंकि इंटरनेट में काफ़ी तरह की खामियां मौजूद हैं, जिसके चलते आप कभी भी अपने डेटा इत्यादि की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हो सकतें हैं। जिसके चलते बदलती तकनीक के साथ आपको भी साइबर जोख़िम को कम करने वाले नए नए तरीके अपनाने पड़ रहें हैं।

दिलचस्प बात तो यह है कि अब इससे कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है। लेकिन कहीं न कहीं अब हर क्षेत्र की बढ़ती सजगता भी साइबर जोखिमों को कम करने के समाधानों को ढूंढने में अतरिक्त बल दे रही है।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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