प्राइवेसी नियमों के उल्लंघन के चलते Facebook ने फ़िर बैन किये 1000 से अधिक Apps

प्राइवेसी और संबद्ध डेटा उल्लंघनों के बीच, Facebook ने एक बार फ़िर इस हफ़्ते एक बड़ा क़दम उठाया है। दरसल आपको बता दें कि Cambridge Analytica विवाद के बाद से ही कंपनी प्लेटफ़ॉर्म की जाँच कर रही है।

और इस जाँच में मुख्यतः ऐसे Apps की जाँच की जा रही है, जिनपर उपयोगकर्ताओं का डेटा इत्यादि संदेहपूर्ण स्थिति में उपयोगक किया जा रहा है। और ऐसी ऐपों के सामने आने पर Facebook द्वारा उन्हें तुरंत ही प्लेटफ़ॉर्म से बैन किया जा रहा है।

और अब इसी सन्दर्भ में इस हफ़्ते भी Facebook ने घोषणा करते हुए बताया कि कंपनी ने अपने ऐप डेवलपर्स में चल रही जांच के एक हिस्से के रूप में एक बार फ़िर से “हजारों” Apps को प्लेटफ़ॉर्म से बैन कर दिया है।

हम आपको बता दें कि कैंब्रिज एनालिटिका विवाद में यह खबर थी कि भारत में 5 लाख से अधिक फेसबुक उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी दाव पर लगाई गई। और Facebook भारत या विश्व भर एक हर बड़े उपयोगकर्ता आधार वाले देश में अपनी पहचान को ख़राब नहीं होने देना चाहता है।

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और शायद इसी वजह से इस विवाद के सामने आते ही Facebook ने कड़े कदम उठाने और इनके ऐलान का सिलसिला शुरू कर दिया है। कंपनी का कहना है कि इन क़दमों के जरिये वह यह साफ़ स्पष्ट करना चाहती है कि डेटा संग्रह विशेषाधिकार का दुरुपयोग करने वाली ऐप्स को प्लेटफ़ॉर्म पर कभी जगह नहीं दी जाएगी और फेसबुक ऐप डेवलपर्स से उन्हें तत्काल ही बैन कर दिया जाएगा।

कंपनी ने एक अधिकारिक पोस्ट के जरिये कहा,

“अब तक इस जाँच में लाखों ऐसी Apps को जांचा परखा गया है और आगे भी हम अपनी यह जाँच जारी रखेंगें, हालाँकि इस बीच नियमों का उल्लंघन करने वाली Apps को तत्काल प्रभाव से निलंबित भी कर दिया गया है।”

साथ ही फेसबुक ने स्पष्ट किया कि सभी ऐप्स ने उपयोगकर्ता की गोपनीयता के लिए कोई खतरा पैदा नहीं किया है, क्योंकि कई लाइव नहीं थे और अभी भी परीक्षण के चरण में थे।

यह भी बताया गया कि निलंबित किए गए ऐप 400 डेवलपर्स से जुड़े थे। इसके साथ ही फेसबुक ने तृतीय पक्षों से प्राप्त उपयोगकर्ताओं डेटा को अनुचित तरीके से साझा करने, उपयोगकर्ता की रजामंदी के बिना तीसरे पक्ष को डेटा उपलब्ध कराने, या सेवा की अन्य शर्तों का उल्लंघन करने वाली Apps को भी पूरी तरह से बैन कर दिया है।

आपको बता दें कि चुनावों को प्रभावित करने के लिए राजनीतिक विज्ञापनों के लिए अभियान बनाने में मदद करने के आरोपों पर भी Facebook कई अंतरराष्ट्रीय सरकारों द्वारा जाँच के घेरे में है। लेकिन कैंब्रिज एनालिटिका विवाद के चलते (जिसमें करीब 87 मिलियन उपयोगकर्ताओं की सहमति के बिना उनके डेटा का उपयोग करने का आरोप है) कंपनी के अंतराष्ट्रीय स्तर पर काफी बदमानी हुई।

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इस बीच यह तो साफ़ देखा गया है कि तब से Facebook ने ऐप डेवलपर्स के लिए अपनी गोपनीयता नीतियों और शर्तों को लगातार अपडेट किया है, और भले ही अब तक लीक और डेटा उल्लंघनों को पूरी तरह से रोका न जा सका हो, लेकिन इस दिशा में कंपनी की कोशिशें नज़र आती दिखाई देने लगी हैं।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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