क्या वाकई Facebook की ओर से हट रहा है लोगों का मन?

इस बात में कोई दोहराय नहीं है कि इंटरनेट का इस्तेमाल सभी आयु वर्ग के लोगों के बीच काफ़ी तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन जैसे-जैसे इंटरनेट की उपलब्धता आसान होती जा रही है, उसी रफ़्तार से इसके इस्तेमाल के आयामों में भी प्रसार भी हो रहा है।

हालाँकि इंटरनेट की इस बढ़ती दुनिया का सच यह भी है कि समय के साथ उपयोगकर्ता भी डिजिटल आयामों को लेकर अधिक समझदार होते जा रहें हैं। और यही कारण है कि अब लोग अपनी रूचि के साथ ही साथ सुरक्षा और प्राइवेसी जैसे  पहलुओं का भी खासा ध्यान रखते हैं।

वहीँ इस डिजिटल दुनिया का एक यह भी है कि आज एक सेवा के लिए लोगों के पास काफी विकल्प मौजूद हैं। इसलिए कंपनियों को अब रोज़ की रोज़ मेहनत और कुछ नया करने की जरूरत पड़ रही है, ताकि वह उपयोगकर्ताओं को अपने प्लेटफ़ॉर्म से बाँधें रख सकें।

अगर बात की जाए इंटरनेट की दुनिया के कुछ बड़े ख़िलाड़ी जैसे फेसबुक (Facebook) की, तो हम यह साफ़ देख सकतें हैं कि अब उपयोगकर्ता भी इस प्लेटफ़ॉर्म को लेकर थोड़ा सतर्क हो रहें हैं। और हों भी क्यूँ न? हाल ही में प्राइवेसी लीक को लेकर लगातार सामने आ रहें विवादों के चलते कंपनी ने बहुत से उपयोगकर्ताओं के साथ ही साथ निवेशकों और कई सरकारी संस्थाओं का भी भरोसा खोया है।

आंकड़ों की बात करें तो, एक रिसर्च फर्म eMarketer के अनुसार, Facebook ने बीते साल 2018 में अकेले अमेरिका में ही करीब 30 लाख (2.8 मिलियन) उपयोगकर्ताओं ने प्लेटफ़ॉर्म का दामन छोड़ दिया। इस रिसर्च में यह ही बात साफ़ की गई कि प्लेटफ़ॉर्म छोड़ने वाले इन लोगों ने सभी 25 वर्ष से कम आयु वर्ग के लोग थे।

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इसके साथ ही कई रिपोर्ट्स में यह बात भी सामने में भारत में भी न तो सरकार ही कंपनी से खुश है और न ही उपयोगकर्ता।

Facebook के पास हैं लोगों की निजी तस्वीरें और निजी जानकरियां

डेटा प्राइवेसी को लेकर बीता साल फेसबुक (Facebook) के लिए काफी मुश्किल साबित हुआ। और कंपनी के लिए दिक्कत यह है कि इसके चलते बहुत से लोगों ने प्लेटफ़ॉर्म पर भरोसा करना छोड़ दिया है। और अब अधिकतर लोग अब अपनी निजी जानकारियों को इस प्लेटफ़ॉर्म पर साझा करने से कतराते नज़र आते हैं।

इसके साथ ही लोगों के फेसबुक से हटते मन का एक कारण यह भी है कि अब लोगों के पास मैसेजिंग से लेकर फ़ोटो शेयरिंग तक के काफ़ी विकल्प हैं। और यह विकल्प खुद Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफ़ॉर्म के जरिये फेसबुक ही प्रदान कर रहा है।

और आप खुद जरा सोचिए कि अब महज़ ‘फेसबुक फ़ीड’ से कंपनी लोगों को प्लेटफ़ॉर्म पर कब तक बाँधें रख सकती है। और इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि अब ‘फेसबुक फ़ीड’ क्या पहले की ही तर्ज़ पर आपके लिए प्रासंगिक रह गया है? कहीं यह महज़ विज्ञापनों और अवांछित पोस्ट से तो नहीं भर गया है।

WhatsApp स्टोरीज इत्यादि के चलते भी हुआ है फेसबुक को नुकसान

आपको याद हो तो लोगों ने सबसे पहले फेसबुक के इस्तेमाल करना इसलिए शुरू किया क्यूंकि वह प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी फ़ोटो, अपने अन्य पोस्ट, लाइफ इवेंट इत्यादि को साझा कर सकें। 

लेकिन अब जब से मैसेजिंग के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहें प्लेटफ़ॉर्म, WhatsApp ने स्टोरीज़ का विकल्प जोड़ा है, तब से लोगों ने इस आसानी से इस्तेमाल में आने वाले प्लेटफ़ॉर्म को ही अपने पोस्ट और बाकी सभी चीज़ों को साझा करने के लिए भरपूर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है। 

और एक बात हमें यह भी ध्यान रखनी चाहिए कि WhatsApp जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर लोग अपने पोस्ट को महज़ अपने जानने वालों तक ही साझा करने को लेकर आश्वस्त रहते हैं। 

खैर! यह तो नहीं कहा जा सकता कि Facebook का अस्तित्व समाप्ति की ओर है। क्यूंकि यह बिल्कुल भी सच नहीं है। भले ही डेटा लीक और न्यूज़ फ़ीड इत्यादि की प्रासांगिकता पर कितने ही सवाल क्यूँ  न उठा लिए जाएँ, लेकिन यह भी सच है लोगों की डिजिटल दुनिया का एक हिस्सा बन चुका यह प्लेटफ़ॉर्म उनकी आदतों से जाने में काफी समय ले सकता है, और इसको हटाना उतना भी आसन नहीं होने वाला है।

 

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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