August 8, 2020
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laws of franchise contract

भारत में Franchise जगत से जुड़े कुछ अहम क़ानून

हालांकि एक बात तो साफ है कि Franchise से संबंधित भारत में कोई विशेष कानून अलग से नहीं है। जैसा हम अन्य प्रकार के विषयों से संबंधित और दूसरे क्षेत्रों में देखते है कि वहां पर अलग कानून होता है और उसके अनुरूप चीजों को आगे क्रियान्वित किया जाता है। लेकिन विशेष रूप से Franchise के क्षेत्रों में कोई अलग कानून नहीं है।

हालांकि इसके विपरित इससे संबंधित विधि, दिशा निर्देश और दूसरे अधिनियम में जानकारी प्रदान की गई है। पहले भारत के वित्त अधिनियम ने इससे संबंधित कुछ जानकारी प्रदान की है थी लेकिन बाद में इस अधिनियम को ही हटा दिया गया। इसके बदले वस्तु एवम् सेवा कर अधिनियम लाया गया। वित्त अधिनियम में मुख्य रूप से Franchise को परिभाषित किया गया था। यह परिभाषा सेवा कर से संबंधित था। मुख्य रूप से एक समझौते के द्वारा Franchise को सामान बेचने और निर्माण करने अथवा किसी Franchisor के द्वारा ट्रेडमार्क, सर्विस मार्क, ट्रेड नाम, लोगो की गई प्रक्रिया को सेवा प्रदान करने का अधिकार है। Franchisor एक ऐसा व्यक्ति होता है जो Franchisee की मदद से Franchise में शामिल होता है। यह परिभाषा अब के वस्तु एवम् सेवा कर अधिनियम में शामिल नहीं किया गया है।

इसके अलावा भी Franchise से संबंधित कई सारे अधिनियम में इसको शामिल किया गया है। भारत में Indian Contract Act 1872, The Sales of Goods Act 1930 और Specific Relief Act 1963 में इसकी जानकारी दी गई है।

आपको पता होगा कि भारत में  Franchise एग्रीमेंट्स का पंजीकरण करना जरूरी नहीं है। इसके साथ ही भारत का कानून Franchise एग्रीमेंट्स को समाप्त करने में भी हस्तक्षेप नहीं करता है। इसी वजह से Franchise एग्रीमेंट्स के टर्मिनेशन के प्रावधानों को शामिल करने के लिए पार्टी बिल्कुल स्वतंत्र है।

यदि Franchise एग्रीमेंट्स को समाप्त कर दिया जाता है तो Franchise के व्यवसाय को संभालने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय Franchisor की जरुरत होती है जो उसकी क्षमता और विदेशी निवेश के दिशा निर्देशों पर मुख्य रूप से आधारित होती है। यदि व्यवसाय का संचालन करने वाली भारतीय कंपनी अंतरराष्ट्रीय Franchisor और भारतीय Franchisee के बीच सिंगल ब्रांड रिटेल क्षेत्र में एक ज्वाइंट वेंचर है तो उस परिस्थिति में Franchisor ज्वाइंट वेंचर में Franchisee के हित को अपना लेती है जिससे कि भारतीय कंपनी अंतरराष्ट्रीय Franchisor में पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन जाती है।

Foreign Exchange Management Act के अनुसार भारतीय कंपनी में किसी विदेशी पक्ष के द्वारा भारतीय पक्ष को शेयर का ट्रांसफर एक सीमित कीमत पर ही किया जाना संभव है। निवेश के समय विदेशी पक्षकार को एग्जिट कीमत के बारे में आश्वासन नहीं देना है और इसके साथ साथ यह सौदा एक चार्टर्ड अकाउंटेंट या फिर  सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया के किसी पंजीकृत मर्चेंट बैंकर के माध्यम से ही संभव है।

Foreign Exchange Management Act के अनुसार कोई भी विदेशी कंपनी भारत में प्रॉपर्टी के लीज के लिए सीधा हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। इसमें भी कुछ अपवाद जरूर है और वह धारा 2 में बताया गया है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय Franchisor को भारत में Franchisee पोजिशन पाने के लिए अपना अस्तित्व स्थापित करना होगा तब जाकर उसे लीज मिल सकती है।

Indian Contract Act

भारत में Contract Act बहुत सारे मामलों में काम करता है। जिसमें मुख्य रूप से कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मेशन, परफॉर्मेंस और कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन शामिल है। इसके साथ ही कुछ परिस्थितियों में कॉन्ट्रैक्ट को कानूनी मान्यता नहीं मिल पाती है। इसमें मुख्य रूप से जब कोई निर्दोष पक्ष द्वारा कॉन्ट्रैक्ट की अनुमति दे दी जाती है लेकिन वह कॉन्ट्रैक्ट गलत तरीके से और किसी के बहकावे में आकर किया जाता है तो फिर उसे कानूनी मान्यता नहीं मिलती है। गलत तरीक़े से कॉन्ट्रैक्ट में शामिल होना और उसे तोड़ मरोड़ कर पेश करने के लिए भी Contact Act में परिभाषित किया गया है:-

1.) गलत मामलों का एक सही विवरण पेश करना, हालांकि यह दूसरी चीज है कि जो व्यक्ति इसे पेश करता है वह गलत को भी सही ही मानता है।

2.) कॉन्ट्रैक्ट के विषय के रूप में किसी एक पार्टी के द्वारा कॉन्ट्रैक्ट में गलती करना।

3.) जो व्यक्ति कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन कर रहा है और दूसरे व्यक्ति को गुमराह कर रहा है और कर्तव्यों का भी उल्लंघन कर रहा है।

हालांकि दो पक्ष के सहमति से ही कॉन्ट्रैक्ट बनता है और इसमें भी बहुत सारे ऐसी बिंदु है जो कॉन्ट्रैक्ट बनाने के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते है।

Sales of Goods Act

Sales of Good Act के माध्यम से भी Franchise के क्षेत्रों में कानून को समझा जा सकता है। इसमें सामानों की बिक्री के बारे में बताया गया है। यह कानून 1930 में पारित किया गया था। सामानों की बिक्री के लिए कॉन्ट्रैक्ट को बताया गया है। इस कानून में मुख्य रूप से सामानों के बिक्री को लेकर बताया गया है और व्यापार से संबंधित चीज़ों को समझाया गया है।

Specific Relief Act

Specific Relief Act में भी एक तरीके से Franchise से संबंधित कुछ कानूनों की चर्चा की गई है। यह साल 1963 में परितेकिया गया था। बाद में साल 2018 में इस अधिनियम में संशोधन भी हुआ था। इस कानून में कॉन्ट्रैक्ट लागू होने के लिए उपलब्ध उपायों की चर्चा की गई है। इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्ट के उल्लंघन के मामले में विशेष रूप से कॉन्ट्रैक्ट परफॉर्मेंस की भी बात की गई है। इसके साथ ही पीड़ित पक्ष किसी तीसरे पक्ष को इस कॉन्ट्रैक्ट में शामिल कर सकता है और अपने खर्चे और कीमत को डिफॉल्ट पक्ष के बदले में वसूल सकता है।

Franchise एग्रीमेंट्स के तहत मूल कंपनी की गारंटी या फिर बैंक गारंटी देने के लिए Franchisee की आवश्यकता हो सकती है।

Foreign Exchange Management Act के अनुसार एक भारतीय कंपनी या फिर व्यक्ति आरबीआई के पूर्व अनुमति के बिना सीमित परिस्थितियों को छोड़कर भारत के बाहर किसी कंपनी या व्यक्तिगत निवासी के पक्ष में गारंटी जारी नहीं कर सकता है। इसके साथ ही इसकी भी कोई गारंटी नहीं है कि भारतीय रिजर्व बैंक इसकी अनुमति दे ही दे।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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