संवाद 2018: भारत की लिस्ट में 1,200 नए टेक स्टार्टअप हुए शामिल, 8 को मिला यूनिकॉर्न क्लब का दर्जा

इस बात में कोई संशय नहीं है कि भारतीय स्टार्टअप जगत का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है। हालाँकि इन टेक स्टार्टअप का स्ट्रक्चर और समयकाल बेशक ही एक अलग ही मुद्दा है। लेकिन अगर फ़िलहाल उन चीज़ों को अपनी परे रखें तो इस साल में अभी सितंबर तक में ही देश को 1200 नए टेक स्टार्टअप मिल चुकें हैं, जिनमें से 8 ने यूनिकॉर्न क्लब (1 बिलियन डॉलर का मूल्यांकन) में जगह बनाने में कामयाबी हासिल की है।

इन आंकड़ों को कल NASSCOM द्वारा बैंगलोर में हो रहे 15वें Nasscom Product Conclave 2018 के दौरान पेश किया गया। यदि आंकड़ों की बात की जाए तो यह आंकडें 2017 के आंकड़ों से कहीं ज्यादा बेहतर हैं।

दरसल साल 2018 को स्टार्टअप तंत्र के लिहाज़ से काफी शानदार बताते हुए, NASSCOM के प्रेसिडेंट देबजानी घोष ने कहा,

“भारतीय स्टार्टअप्स ने इस वर्ष निवेश हासिल करने के लिहाज़ से 108% की बढ़त दर्ज़ की है। पिछले साल 2017 में जनवरी से सितंबर के बीच जहाँ स्टार्टअप जगत महज़ $2 बिलियन का निवेश ही हासिल कर पाया था। वही इस साल इसी अवधि में भारतीय स्टार्टअप्स $4.2 बिलियन का निवेश अर्जित करने में कामयाब रहें हैं।”

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इस दो दिवसीय कार्यक्रम के मौके पर IT इंडस्ट्री अपैक्स बॉडी ने अपनी एक रिपोर्ट  ‘Indian Startup Ecosystem – Approaching Escape Velocity’ भी पेश की। इस रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में देश में कुल 7,700 tech स्टार्टअप हैं, जो इस लिहाज़ से भारत को दुनिया भर में तीसरा बड़ा देश बनाते हैं। 

इसके साथ ही देश में स्टार्टअप के जुड़ने की दर में पिछले साल के मुकाबले जहाँ 15% की वृद्धि हुई है। वहीँ देश में इनक्यूबेटर्स और एक्सेलरेटर्स भी तेजी से बढ़ते हुए 11% की वृद्धि दर्ज़ करवा पाने में सफ़ल हुए हैं। और सबसे हर्ष की बात यह है कि महिला उद्यामिओं की संख्या में भी 14% की वृद्धि दर्ज की गयी है, जो पिछले साल महज़ 10% से 11%  ही थी।

स्टार्टअप ने जॉब क्रिएशन में भी दिया भारी योगदान

स्टार्टअप तंत्र का एक सबसे बड़ा फायदा जो किसी भी देश को मिलता है, वह है ‘नई जॉब्स’। इस वर्ष भारतीय स्टार्टअप ने 40,000 नई जॉब्स प्रदान की हैं। इसके साथ ही स्टार्टअप तंत्र देश अब तक कुल 1.6-1.7 लाख जॉब्स प्रदान कर चुका है।

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हालाँकि सीड फंडिंग की बात की जाए तो इसमें 21% की गिरावट देखने को मिली है। हालाँकि इसके बाद भी एंजेल निवेशकों का भरोसा आज भी भारतीय स्टार्टअप में बरक़रार है। निवेशक जहाँ नए उद्यमियों की कुशलता को लेकर आश्वस्त नज़र आने लगे हैं। वहीँ निवेश चेक के साइज़ में भी अब बढोतरी देखने को मिल रही है। 😉

हालाँकि कई बाहरी बड़े निवेशकों ने भी अब भारतीय स्टार्टअप का रुझान किया है। और देखने वाली बात यह होगी कि आखिर भारतीय स्टार्टअप तंत्र में अंततः स्टार्टअप्स की संख्या के साथ ही साथ उनके वास्तविक योगदान और जैसा कि कहा जाता है कि एक नया विचार अनेकों सकारात्मक संभावनों से भरा होता है, तो क्या ये नए भारतीय स्टार्टअप इन संभावनाओं को वास्तविकता का रूप दे पाते हैं या नही।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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