इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार करेगी 40,000 करोड़ रूपये का निवेश

बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरण के तेजी से हो रहे क्षरण को देखते हुए दुनियाभर में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है और इस बात में कोई संशय नहीं कि इसमें आगे और भी तेजी देखने को मिलेगी

ऐसे में भारत भी इससे अछूता नहीं है। देश में केंद्र सरकार कथित तौर पर बुनियादी ढाँचे और विनिर्माण इकाइयों को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। और इसक एक उदाहरण आज भी पेश करते हुए केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) आपूर्तिकर्ताओं को और अधिक सब्सिडी और लाभ देने पर विचार करने को कहा है।

दरसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार 2020-21 से 2029-30 के बीच ऋण छूट और मिश्रित लाभ सहित लगभग 40, 000 करोड़ खर्च करने की योजना बना रही है।

दरसल इंडस्ट्री को देने वाली इस मदद के जरिये सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों की लागत में कमी लाने की उम्मीद कर रही है, ताकि उपभोक्ता के लिए इसे और अधिक किफायती बनाया जा सके।

इसके साथ ही इसका मुख्य उद्देश्य है कि हम चीन पर निर्भरता को कम कर सकें। हम आपको बता दें कि वर्तमान में चीन इलेक्ट्रिक कारों और उनके भागों के लिए सबसे बड़ा उत्पादक और बाजार है।

रिपोर्ट के अनुसार ऐसा लगता है कि इस कदम के जरिये सरकार सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को समर्थन देने की भी उम्मीद कर रही है क्योंकि इस क्षेत्र में EV काफी संभावनाएं निहित किये हुए है। इस योजना को ‘मेक इन इंडिया’ के तहत पेश किया जा सकता है और यह इलेक्ट्रिक वाहनों (FAME) के तेज़ संचालन और विनिर्माण कोए लेकर काम करेगा।

इससे पहले भी सरकार ने साझा परिवहन के विद्युतीकरण को बढ़ावा देने, ईवी बैटरी के निर्माण और चार्जिंग संरचना के विकास के लिए तीन साल के FAME चरण 2 के लिए करीब 10,000 करोड़ की घोषणा भी की थी।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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