IIT-Mandi और NIRDPR संयुक्त रूप से करेंगे 'हिमाचल प्रदेश' में 'मनरेगा कार्यान्वयन' पर अध्ययन

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) मंडी ने हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में मनरेगा के सफल कार्यान्वयन पर अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज (NIRDPR) का सहयोग करेगा।

इसके तहत हिमाचल प्रदेश में ‘सफल प्रथाओं और स्केलेबल मॉडल के दस्तावेज़ीकरण’ नामक अध्ययन में  मनरेगा के सफल कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार प्रथाओं और प्रक्रियाओं को पहचानने और चित्रित करने का कार्य किया जाएगा।

यूँ देखा जाए तो हिमाचल प्रदेश अपनी जलवायु, संस्कृति और कृषि चक्रों की स्थलाकृति, के साथ ही शहरी रोजगार, औद्योगिक कारखानों की अनुपस्थिति के कारण देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफ़ी अलग है, लेकिन  इसके बावजूद हिमाचल प्रदेश ने ग्रामीण संपत्ति निर्माण, सूक्ष्म जलविद्युत विकास, शहरी प्रवास की जांच, महिलाओं को सशक्त बनाने और एससी उत्थान सहित मनरेगा के कुछ मुख्य उद्देश्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

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वहीँ NIRDPR के सेंटर फॉर वेज एम्प्लॉयमेंट की प्रमुख, एस ज्योतिस ने कहा,

“यह अध्ययन ग्रामीण विकास मंत्रालय की वार्षिक कार्य योजना के तहत NIRDPR द्वारा समर्थित है, जो बताता है कि हिमाचल प्रदेश में मनरेगा केवल बुनियादी ढांचे, प्राकृतिक और सामाजिक पूंजी निर्माण के मामले में ही नहीं, बल्कि विकेंद्रीकृत शासन और महिला सशक्तिकरण जैसी चीज़ों को लेकर भी मददगार साबित हुआ है”

इस अध्ययन में पाया गया कि राज्य के मंडी जिले में महिलाओं के जीवन में मनरेगा का प्रभाव सबसे महत्वपूर्ण रूप से देखा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में मनरेगा के तहत लगभग 75% काम देश में 48% राष्ट्रीय औसत के मुकाबले महिलाओं के माध्यम से किया गया था। इसके अलावा, जिले में कुछ पंचायतों एवं मनरेगा के तहत काम करने वाली महिलाओं ने अपनी पहचान स्थापित कर, महिलाओं के समूहों का निर्माण कर, शराब पर भी प्रतिबंध लगावाया।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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