भारतीय सेना ने अधिकारियों को दिए Facebook और WhatsApp छोड़ने के निर्देश

भारतीय सेना के सलाहकार बोर्ड ने सभी लोकप्रिय सोशल मीडिया मैसेजिंग ऐप्स खासतौर पर Facebook और WhatsApp पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है। 

खास यह है कि इसके तहत भारतीय सेना में महत्वपूर्ण पद पर बैठे अधिकारीयों को WhatsApp और Facebook जैसी ऐप्स के इस्तेमाल को बंद करना होगा, क्यूंकि इसके जरिये कथित रूप से हैकिंग और गोपनीय डेटा के लीक होने का ख़तरा बना रहता है।

आपको बता दें कि यह फ़ैसला हाल ही में WhatsApp के Pegasus Spying विवाद के चलते लिया गया है, जिसमें पिछले ही महीनें सामने आया था कि कई हैकर्स देश के कुछ अहम लोगों की चैट डिटेल हैक कर रहें हैं।

दिलचस्प यह है कि इस Pegasus Spying विवाद में सरकार की भी भागीदारी के कथित आरोप लगाए जा रहें हैं। हालाँकि इस मामले में अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि आखिर कौन भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और पत्रकारों के फोन की जासूसी के लिए ज़िम्मेदार है।

इस बीच इन्हीं सब विवादों के बीच सुरक्षा उपाय करते हुए सेना ने पिछले महीने एक एडवाइजरी जारी की जिसमें डिवीजनों और ब्रिगेडों में संवेदनशील पदों आसीन सभी अधिकारियों को WhatsApp और Facebook के आधिकारिक उपयोग को बंद करने की चेतावनी दी गई थी। आपको बता दें इसका ख़ुलासा The Print की एक रिपोर्ट द्वारा हुआ था।

हालाँकि जहाँ एक तरफ Pegasus-WhatsApp Spying विवाद ने WhatsApp की विश्वसनीयता पर एक बार फ़िर से सवाल खड़े कर दिए हैं वहीँ यह भी जाहिर हुआ कि इसके एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन को अभी तक कंपनी ने जरूरत के हिसाब से पुख्ता नहीं किया है।

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दरसल आपको बता दें Pegasus-WhatsApp Spying विवाद असल में इजरायल-आधारित NSO समूह द्वारा विकसित निगरानी सॉफ्टवेयर Pegasus के चलते हुआ है, जो केवल सरकारों और सरकारी एजेंसियों के साथ काम करता है।

दरसल इस बीच सेना के साइबर डिवीजन ने भी सोशल मीडिया ट्रेंड का विश्लेषण किया और अपने अधिकारियों द्वारा इंटरनेट का इस्तेमाल करने के तरीकों पर काफी गहन विचार किया जा रहा है।

सेना का दावा है कि Facebook और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में खुफिया जानकारी इकट्ठा करने की क्षमता रखते हैं और यह सेना के जवानों के परिवारों और दोस्तों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

इसके अलावा सुरक्षा एहतियात के तौर पर सेना के अधिकारियों और उनके परिवारों को उनकी वर्दी में तस्वीरों या अपने स्थानों की तस्वीरों को पोस्ट करने से रोकने के लिए कहा गया है, दरसल यह सेना के अधिकारीयों से संबंधित काफ़ी संवेदनशील स्थानों का विवरण जाहिर कर सकती हैं।

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आपको बता दें कि सेना के लिए सोशल मीडिया नीति 2016 से लागू की है हालाँकि इसे अभी तक उस गंभीरता से नहीं लिया गया है।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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