June 3, 2020
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लॉकडाउन जैसे हालातों में भी क्यों Franchise Business जगत में उभरने की संभावनाएं हैं ज्यादा?

कोरोना वायरस जैसी संक्रमण आधारित महामारी के साथ सबसे बुरा यह होता है कि यह लोगों की जिंदगियों के साथ ही साथ देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था की रफ़्तार में भी रोक लगा देती है। और यह सिर्फ कहीं-सुनी बातें तो नहीं हैं, इसका प्रमाण मौजूदा हालात साफ़ बताते हैं। 

इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक HS Markit से जुडें अर्थशास्त्री, Joe Hayes के अनुसार अकेले भारत के जीडीपी डेटा की तुलना करें तो भारत की अर्थव्यवस्था अप्रैल में ऐतिहासिक रूप से 15-20% की वार्षिक दर से सिमटने लगी है। और यह तो जग जाहिर है कि भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण से पहले भी आर्थिक मोर्चे पर देश की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं कही जा सकती थी। 

कई रिपोर्ट्स तो यह भी बताती हैं कि वित्त वर्ष 2020-21 में भारत के GDP आँकड़े पहले ही तुलना में 1-2% गिरावट दर्ज कर सकतें हैं, जो वाकई सुनने में भले कम लगे, लेकिन इसका प्रभाव देश के लगभग हर तबके पर काफ़ी बड़ा हो सकता है। 

इसका कारण समझने के लिए भी कोई रॉकेट साइंस की जरूरत नहीं, वह साफ़ से ही हैं, देश में करीब 1 महीनें से भी अधिक समय से चल रहे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन के चलते देश की GDP में बड़ा योगदान देने वाला लगभग हर तरह का बिज़नेस ठप पड़ा है। फिर बात चाहे मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी, ट्रेवल जैसे बड़े और संगठित क्षेत्र की हो या फिर ग्रूमिंग, लांड्री जैसे संभावनाओं से भरे असंगठित क्षेत्रों की, सभी महामारी के चलते बुरी तरह से प्रभावित हैं। 

लेकिन आखिर कब तक? कब तक आप देश की अर्थव्यवस्था को यूँ बांधे रख सकतें हैं या रख पायेंगें? सरकारों के कोष खाली होतें जा रहें हैं। दिल्ली जैसे तमाम राज्य, टैक्स के जरिये न के बराबर हो रही कमाई का हवाला देते हुए सरकारी कमर्चारियों की सैलरी तक देने में असमर्थता जतानें लगें हैं। ऐसे में जरूरी है कि कुछ न कुछ तरीकों और सावधानियों के साथ देश में व्यापार को वापस से खोला जाए और अब केंद्र और राज्य सरकारें भी इस बात को समझनें लग गयी हैं। 

हाल ही में लॉकडाउन के तीसरें चरण के ऐलान में सरकारों द्वारा कुछ राहत भी दी गयी। केंद्र सरकार ने देशभर को ग्रीन, ऑरेंज और रेड ज़ोन के साथ कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों के आधार पर तीन क्षेत्रों में बांटा, और उसी के अनुसार इन क्षेत्रों में वापस से सेवाओं/बिज़नेस को शुरू करने के लिए कुछ कुछ राहत भी दी गयी।

पर इतने समय के बाद वापस से बिज़नेस को पटरी पर ला पाना कितना आसान होगा?

इस बीच आपने तमाम लोगों को यह कहतें सुना होगा कि मौजूदा हालातों के चलते हर एक बिज़नेस क्षेत्र करीब 1-1 साल पीछे चला गया है। पर हर हालात में सबकों अपने बिज़नेस पर वापस आना ही है और ऐसे में सवाल ये है कि उनके सामनें पारंपरिक चुनौतियों के अलावा नयी कौन कौन सी चुनौतियाँ होंगी? 

मजदूरों की कमी, सरकारी इजाजत और सुरक्षा मानकों को अपनाना, टैक्स आदि में परिवर्तन, ग्राहक संख्या और खर्चों को लेकर ग्राहकों की मानसिकता में आया बड़ा बदलाव, सप्लाई-चेन, मार्केटिंग और आदि के खर्चों में बैलेंस जैसे तमाम मुद्दें हैं जो लगभग हर तरह के बिज़नेस क्षेत्र में परेशानी का सबब बनतें नजर आयेंगें। 

लेकिन Franchise मॉडल आधारित बिज़नेस के पास पारंपरिक/व्यक्तिगत व्यवसायों की तुलना में होगी बढ़त!

ऊपर जिन जिन मुश्किलों का जिक्र किया गया, बेशक वह सभी बिज़नेस क्षेत्रों में नजर आयेंगी। लेकिन अब बात की जाए कि इन हालातों और मुश्किलों से निपटने के लिए कौन कितना सक्षम है। और जब बात देश के बिज़नेस जगत और इसके तमाम स्वरूपों की हो तब आप ‘Franchise बिज़नेस’ को अनदेखा नहीं कर सकते। 

दरसल कुछ दशक पहले ही देश की जीडीपी में करीब 0.5% से भी कम हिस्सेदारी रखने वाल यह जगत मौजूदा समय में अनुमानित तौर से देश की जीडीपी में 2% तक का योगदान दें रहा है और इतना ही नहीं बल्कि 2025 तक इस आंकडें के 5% तक होने की उम्मीद है

दरसल 4,600 सक्रिय Franchisors (50% क्षेत्रीय ब्रांड, 34% राष्ट्रीय ब्रांड और 16% वैश्विक ब्रांड) और करीब 170,000 Franchisees द्वारा संचालित 200,000 आउटलेट्स के साथ, अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Franchise बाजार है।

बीतें 20 सालों में देश में कई अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स जैसे Baskin-Robbins, Burger King, ChemDry, Domino’s, KFC, McDonald’s, RE/MAX, और Subway आदि पूरी ताकत से देश में प्रवेश और प्रसार करते नजर आयें हैं। इतना ही नहीं बल्कि देश के ही कई स्थानीय ब्रांड्स जैसे Kidzee, Jawed Habib, Café Coffee Day (CCD) और UClean आदि नाम भी काफी कम वक़्त में बाजार में एक बड़ी हिस्सेदारी अपने नाम करते दिखाई दिए हैं। 

इन ब्रांड्स ने देशभर में तमाम कोशिशें की और अपनी ब्रांड वैल्यू के साथ ही साथ अपने Franchise पार्टनर्स को भी सशक्त बनाने का काम किया। और देखा जाए तो इस महामारी व लॉकडाउन में थोड़ी राहत के बाद इन Franchise मॉडल आधारित ब्रांड्स और देश भर में फैले इनके Franchise पार्टनर्स के लिए अन्य बिज़नेस की तुलना में मौजूदा हालातों से निपटना थोड़ा आसन जरुर हो जाता है। कैसे? 

Franchise Brands के लिए क्यों है थोड़ी राहत?

अगर देखा जाए तो Franchise Brands के लिए उनका कारोबार और जाहिर तौर पर राजस्व/कमाई का जरिया देश के कई हिस्सों में बटा होता है। ऐसे में मौजूदा हालातों को देखें, जब सरकार ने बिज़नेस को फिर से शुरू करने के लिए देश को तीन क्षेत्रों को बाँट, चुनिंदा क्षेत्रों में ही राहत दी है, तो ऐसे में इन ब्रांड्स के लिए संभावनाएं बढ़ जाती हैं कि अगर रेड जोन या कन्टेंमेंट जोन में आने वाले इनके कुछ आउटलेट्स किसी कारणवश सामान्य संचालन नहीं कर पा रहें हों, तो भी उम्मीद यह की जा सकती है कि अन्य जोन्स जहाँ संचालन को वापस शुरू कर सकने की इजाजत है, वहां से कंपनी के राजस्व में थोड़ी भागीदारी सुनिश्चित की जा सके!

पर आप अन्य बिज़नेस क्षेत्रों या ब्रांड्स के ऐसी अपेक्षा नहीं कर सकतें। उदाहरण के लिए देश में सबसे व्यापक क्षेत्रों में से एक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को ही ले लीजिये। मानिए अगर किसी कंपनी की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट पाबंदियों वाले क्षेत्र में ही है तो देश भर में उसके सामानों की बिक्री को कंपनी को न चाहतें हुए भी रोकना पड़ सकता है। 

लेकिन जहाँ एक ओर मौजूदा समय में Franchise Brands के लिए इनका बिज़नेस मॉडल अन्य की तुलना में थोड़ा बढ़त लिए हुए है, वहीँ इन ब्रांड्स के Franchise पार्टनर्स के लिए तो यह मॉडल और बड़े वरदान की तरह देखा जा सकता है। इन आउटलेट मालिकों को बिज़नेस को वापस से पटरी पर लाने के लिए कई अहम मोर्चों पर मदद मिल जाती है, जो एक पारंपरिक/व्यक्तिगत रूप से बिज़नेस चलाने वाले  व्यापारियों को नहीं मिल पातीं हैं।

पारंपरिक/व्यक्तिगत बिज़नेस की तुलना में ‘Franchise मालिकों’ के लिए वापस बिज़नेस को पटरी पर लाना कैसे होगा आसान?  

KPMG और Franchise Association of India (FAI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय Franchise इंडस्ट्री में 2013 के बाद से अब तक चार गुना वृद्धि दर्ज की गयी और अब इस इंडस्ट्री की वैल्यूएशन देश में $50.4 बिलियन से भी अधिक तक की हो गयी है। जी हाँ! और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है देश में पिछले 4 से 5 सालों से बढ़ रहा Entrepreneurship कल्चर। और खासियत यह है कि यह इंडस्ट्री लोगों के लिए Entrepreneurship जगत में उतरने का एक सुरक्षित और फायदेमंद माध्यम बन चुकी है।

और इसके कुछ फायदे मौजूदा हालतों में भी नजर आ रहें हैं। इन प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदों पर गौर कीजिये। दरसल Franchise मॉडल आधारित बिज़नेस का संचालन करने वाले Franchise मालिक या जिन्हें हम आमतौर पर ‘Franchise पार्टनर्स’ कहतें हैं, उन्हें लॉकडाउन के बाद भी अपने बिज़नेस को सामान्य बनानें में उनके अपने Franchise Brand से काफी मदद मिल सकती है

– मार्केटिंग सपोर्ट:

मौजूदा वक़्त में किसी भी बिज़नेस के लिए मार्केटिंग सबसे अहम कड़ी रहती है और जब बात Franchise बिज़नेस की हो तो लगभग मोटे तौर पर किसी भी Franchise पार्टनर के लिए मार्केटिंग का सरदर्द न के बराबर होता है, क्योंकी अधिकतर Franchise Brands अपने हर एक Franchise आउटलेट के साथ ही साथ व्यापक तौर पर ब्रांड की पूरी मार्केटिंग लगातार करती रहती हैं, जिसका असर स्थानीय स्तर पर ग्राहकों के बीच भी दिखता है

और यही होता नजर आ रहा है लॉकडाउन के दिनों में भी, जब एक सामान्य व्यापारी परेशान है कि वह वापस से अंपनी सेवाओं के प्रचार प्रसार कर पैसे खर्च करे या फिर संचालन व अपने साथ काम करने वाले कर्मचारियों के खर्चों पर ही अपना ध्यान केन्द्रित करे? ऐसे में Franchise मालिकों के पास इसका जवाब पहले से ही मौजूद है, जहाँ उनके पास मार्केटिंग और ग्राहकों तक सेवाओं के वापस शुरू होने की खबर से लेकर उनके प्रचार तक का सारा दारोमदार फ़िलहाल Brand पर ही डालने की सहूलियत है

– बिज़नेस एक्सपेरिमेंट:

यह एक सबसे अहम बिंदु है। दरसल बिज़नेस क्षेत्र कोई भी हो, लेकिन उसमें अनुभव की भूमिका सबसे अहम हो जाती है। और देश और दुनिया के जो मौजूदा हालात हैं, उन्हें देखते हुए, ऐसा लगता है कि ऐसे में बिज़नेस को संभालनें के लिए शायद सालों का अनुभव भी बहुत कम पड़ जाएँ। और जब आपको सटीक जरिया न पता हो तो आप बिज़नेस में हमेशा सुरक्षित रहते हुए एक्सपेरिमेंट भी करना चाहतें हैं, खासतौर पर स्थिति आज जैसी हो। 

जी हाँ! एक Franchise Brand के तमाम आउटलेट्स अक्सर अलग अलग चुनौतियों का सामना करते ही रहते हैं, और ऐसे में बतौर Franchise Brand, कंपनी अगल अलग हालातों से भी सही ढंग से निपटने के अनुभवों के साथ तैयार होती है और वक़्त आने पर वह इन्हीं अनुभवों को अपने Franchise पार्टनर्स के साथ साझा कर उन्हें सही गाइडेंस दे सकती है। कहनें का साफ़ सा मतलब यह है कि व्यक्तिगत बिज़नेस में आप अपनी सेवाओं को लेकर सिर्फ अपने अनुभवों से सीखतें हैं, लेकी Franchise बिज़नेस में आप अपनी ही तरह की सामान सेवाओं को लेकर तमाम अन्य आउटलेट्स से अनुभवों से सीखते हुए एक सटीक रणनीति तैयार कर सकतें हैं। 

– टेक्निकल और फाइनेंसियल सपोर्ट:

अगर आप Franchise बिज़नेस से जुडें हैं तो आपके पास एक कम्फर्ट ज़ोन और होता है और वह यह कि किसी भी तरह की टेक्निकल या फाइनेंसियल मुश्किल के दौरान आपके Brand के पास तमाम संसाधनों से लैस एक एक्सपर्ट टीम होती है, जो हर तरह से आपकी मदद के लिए गंभीर भी होती है

इन सभी का फायदा यह होता है कि बिज़नेस में आपको मानसिक तौर पर भी उतना तनाव न लेते हुए, आज जैसे मुश्किल हालातों में भी Experts और एक बड़े बिज़नेस नेटवर्क का फ़ायदा मिल जाता है

खैर! अगर Franchise Business की बारीकियां जाननी हों तो भला एक Franchise Expert से बेहतर कौन हो सकता है, और जब वह Franchise Expert इस क्षेत्र में करीब 10 सालों के अनुभव और मौजूदा वक़्त में देश ही नहीं बल्कि एशिया की सबसे तेज बढ़ती Franchise Brand के मालिक हों तो उनको सुनना और भी अहम हो जाता है। जी हाँ! हम बात कर कर रहें हैं देश की लोकप्रिय लांड्री Franchise ब्रांड, UClean के फाउंडर और सीईओ, अरुणाभ सिंहा की। Techसंवाद आपके लिए लाया है मौका सीधे घर-बैठे उनसे रूबरू होकर Franchise जगत की बारीकियों और आज के हालातों में Franchise मॉडल के फ़ायदे जानने का। 

तो आप भी जुड़िये शनिवार, 9 मई को सुबह 11:00 बजे Techसंवाद की इस ‘#COVIDSamvad2020’ पहल के साथ और इस हफ्तें के Expert से जानिए देश में Franchise Business से जुड़ी संभावनाओं के बारें में! इस ऑनलाइन विडियो सेमिनार में रजिस्टर करने के लिए यहाँ क्लिक करें!

एक नजर देश में Franchise Business जगत से जुडें कुछ तथ्यों पर;

– भारतीय Franchise बिज़नेस जगत 2013 से चार गुना बढ़ते हुए $50.4 बिलियन तक पहुँच गया है।
– भारत में 4,600 Franchisors मौजूद हैं, जिनमें 50% क्षेत्रीय ब्रांड, 34% राष्ट्रीय ब्रांड और 16%  वैश्विक ब्रांड की हिस्सेदारी है।
– आपको बता दें भारत में फ़िलहाल लगभग 170,000 Franchise द्वारा संचालित लगभग 200,000 Franchise Outlet हैं।
– खास यह है कि देश में Franchise Business करीब 1.5 मिलियन लोगों को रोजगार दे रहा है।
– भारत में Franchise मालिकों में लगभग 26% महिलाएं हैं।
– करीब Franchise खरीदने वालों में से लगभग 35% लोग पहली बार बिज़नेस क्षेत्र में कदम रखने वालों में से होतें हैं।
– Franchise जगत देश की जीडीपी में लगभग 2% की हिस्सेदारी रखता है, और 2025 तक इस आंकड़े के 5% तक होने की उम्मीद है।
– 5 साल के भीतर विफल साबित होने वाले 90% भारतीय स्टार्टअप्स के मुकाबलें Franchise में सफलता की दर लगभग 85% है।

आँकड़ों का सोर्स: franchising.com

इमेज सोर्स: इंटरनेट 

amicableashutosh@gmail.com'

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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