संवाद 2018: फंडिंग थम जाने पर क्यों फ़िके से पड़ जातें हैं ‘भारतीय टेक स्टार्टअप’? ‘मुनाफ़े’ को लेकर क्यूँ नहीं हैं गंभीर

भारतीय टेक स्टार्टअप क्षेत्र में क्षमताओं और संभावनाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन हमनें अक्सर देखा है कि कई भारतीय टेक स्टार्टअप एक अच्छी शुरुआत के बाद भी लंबे समय तक बाज़ार में अपने पैर नहीं जमाए रख पाते हैं। 

इस तरह के उदाहरण अक्सर हमाने सामने आते रहते हैं, लेकिन आज भी स्टार्टअप क्षेत्र इन चीज़ों को कोई तवज्जों न देते हुए महज़ क्षणिक विकास और निवेश तक ही अपने दायरें को सीमित किये हुए हैं।  

हम हमेशा देखते हैं कि इस तरह के अधिकतर स्टार्टअप एक अच्छा निवेश हासिल करने के बाद भी लगातार राजस्व में नुकसान सह रहें होतें हैं। और अपने राजस्व को सँभालने के बजाए इनका पूरा ध्यान निवेश हासिल करने और उसके जरिये खुद के ब्रांड को एक बड़ा नाम दिलाने में लग जाता है। 

कुछ वर्षों पहले Housing. com के संस्थापक राहुल यादव ने एक अख़बार को दिए अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें एक्सेल शीट पसदं नहीं। यहाँ तक कि जब भी वह किसी निवेशक के पास जाते थे और वह उनसे एक्सेल शीट का जिक्र करता था, तो वह वहीँ उस निवेशक को मना कर देते थे। 

दरसल यहाँ एक्सेल शीट से आशय है, उनकी आय के हिसाब और राजस्व के कमाई और व्यय को लेकर बनायीं गयी एक सटीक प्लानिंग से है। आप ख़ुद सोचिए जब कोई व्यवसाय अपने राजस्व के जरिये को ही नज़रंदाज़ करने लगे, तो सिर्फ़ बाहरी निवेश और खोखली ब्रांडिंग के दम पर वह बाज़ार में कब तक बना रह पायेगा।  

असल में आज बड़े से लेकर छोटे अधिकतर सभी भारतीय टेक स्टार्टअप इसी नजरिये से काम कर रहें हैं। Paytm से लेकर अधिकतर टेक स्टार्टअप अपने अधिकाश उपयोगकर्ता ट्रांजैक्शन पर घाटा झेलते हैं, लेकिन इस खेल को वॉल्यूम का खेल बता अक्सर इन सवालों से किनारा कर लेते हैं। 

दरसल भारतीय स्टार्टअप जगत में एक गलत धारणा है कि Google, Facebook और Amazon जैसी विदेशी तकनीकी दिग्गज कंपनियां तक राजस्व में नुकसान झेलती हैं, तो फ़िर हमारे राजस्व मॉडल में भी कोई दोष नहीं हैं, बल्कि यह तो टेक जगत में स्वाभाविक सी बात है? 

असल में ऐसा कुछ भी नहीं है, हम हमेशा से ही इन दिग्गज़ विदेशी कंपनियों द्वारा इतने वर्षों में खड़े किये गये अनेकों अन्य आयामों के व्यापार को नज़रंदाज़ कर देते हैं। और यह देखना भूल जाते हैं कि Amazon जैसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी का सबसे लाभ देने वाला हिस्सा uska क्लाउड बिज़नेस अर्थात AWS (Amazon Web Services) हैं। 

क्या हैं खामियां?

अगर भारतीय टेक स्टार्टअप क्षेत्र में खामियों की बात की जाए तो पहली सबसे बड़ी खामी जो नज़र आती हैं वह यह कि वह ख़ुद के राजस्व मॉडल का आँकलन विदेशी दिग्गजों के राजस्व मॉडल को आधार बना करना। 

और दूसरी खामी जो नज़र आती है वह यह, कि अपने राजस्व को मुनाफ़े में बनाये रखने के बजाए, विदेशी निवेशकों के सहारे मोटा निवेश हासिल करने की कोशिशें करना। 

क्या हैं जरूरत

अगर इस क्षेत्र में समाधान की बात की जाए तो सबसे जरूरी है, कि टेक स्टार्टअप अपने प्रोडक्ट को उपयोगकर्ताओं के लिहाज़ से आकर्षक बनाने के साथ ही साथ व्यवसाय की दृष्टि से भी प्रत्येक उपयोगर्ता को लक्षित करते हुए आगे बढें।

हो सकता है वॉल्यूम का खेल उन्हें अधिक मुनाफ़ा कमाने में मदद कर सके, लेकिन इसका यह मलतब नहीं कि महज़ वॉल्यूम को आधार बना वह लगातार विस्तार संबंधी कोशिशें कर लोगों तक अपनी पहुँच और ब्रांड स्थापित करने में अच्छा खासा व्यय करते जाए, और अपने वर्तमान राजस्व को लेकर कभी कोई आंकलन ना करें। 

जरूरत हैं अपने मौजूदा आय और व्यय को ढंग से समझ, निवेश को व्यापक तौर पर प्रोडक्ट बनाने हेतु इस्तेमाल कर, उस प्रोडक्ट को अगला निवेश नहीं बल्कि निरंतर राजस्व लाने के लिए इस्तेमाल किया जाए।    

 

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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