July 2, 2020
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कोलकाता कोर्ट ने बैन के बावजूद E-Cigarette Sellers को स्टॉक रखने की दी अनुमति

कोलकाता की एक अदालत, केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए ई-सिगरेट पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाले एक मामले की सुनवाई करते हुए आज विक्रेताओं को अस्थायी रूप से स्टॉक रखने की अनुमति दी है।

हम आपको बता दें की सरकार के फरमान के अनुसार विक्रेताओं को 1 अक्टूबर तक अपने स्टॉक को ज़िम्मेदार अधिकारियों के पास जमा करने के आदेश दिए गये थे।

लेकिन अब कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए सरकार के इस फैसले की समय सीमा को बढ़ा दिया है। और अस्थायी रूप से विक्रेताओं को E-Cigarette स्टॉक रखने की अनुमति दे दी है।

हालाँकि हम आपको बता दें कि अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख निर्धारित की है। यह याचिका मूल रूप से ई-सिगरेट आयातक Plume Vapourऔर एक अन्य ई-सिगरेट कंपनी Woke Vapors द्वारा दायर किया गई थी।

Woke Vapors ने एक बयान में कहा कि यह इस याचिका पर तब तक संघर्ष करती रहेगी जब तक सरकार उत्पाद को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के बजाय बाजार को नियंत्रित करने संबंधी फ़ैसला नहीं लेती है।

हम आपको बता दें कि सरकार पिछले साल से ही ऐसे उत्पादों पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रही है। उत्पादों को लेकर कई चरणों पर विचार करने के बाद, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 18 सितंबर को घोषणा की कि भारत में “तत्काल प्रभाव से” E-Cigarette पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।

सुनवाई के दौरान, भारत सरकार ने इस मुद्दे पर अपने रुख का बचाव किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता अमन लेखी ने सरकार का प्रतिनिधित्व करते हुए कहा कि

“भारत में Juul ecigarettes का आगामी लॉन्च सरकार के फैसले के पीछे का एक कारण था।”

आपको बता दें कि अमेरिका आधारित Juul ने 2019 की दूसरी छमाही में भारतीय पारिस्थितिक सिगरेट बाजार में प्रवेश करने की योजना बनाई थी। कंपनी ने हाल के महीनों में कई वरिष्ठ अधिकारियों को काम पर रखा था।

लेकिन स्वास्थ्य मंत्रालय ने फरवरी 2019 में वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी को पत्र लिखा, जिसमें कंपनी के भारत में प्रवेश को रोकने के लिए कहा गया।

भारत सरकार ने पहले भी कहा था कि Juul जैसी कंपनियों द्वारा निर्मित सिगरेट और ENDS (इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम) उत्पाद हानिकारक थे और एक यह सरकार द्वारा अब तक किए गए तंबाकू नियंत्रण प्रयासों में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

इसके चलते लांच के पहले ही ऐसे उत्पाद को देशभर में बैन कर दिया गया। हालाँकि कोर्ट ने महज़ स्टॉक को अस्थायी तौर पर रखने संबंधी ही अनुमति दी है। लेकिन यह मुद्दा सभी विक्रेताओं के लिए अहम है और इसलिए अब कोर्ट का अगला फ़ैसला काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

amicableashutosh@gmail.com'

Co-Founder & Editor-In-Chief
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