July 1, 2020
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ये Roasting नहीं आसान, बस इतना समझ लीजिए….

आइयें बात करें Roasting की। नहीं उस Roasting की नहीं, जिसकी आँच में इस वक़्त पूरी दुनिया जल-सी रही है, और न ही उस Roasting जो लाखों नंगे पैर, घर वापस जाने की बेचैनी और दर्द की वजह से सह रहें हैं।

ये वो Roasting है जो की तो AC कमरों में बैठ के जाती है, लेकिन उसकी वजह से इंटरनेट का तापमान ज़रूर बढ़ जाता है। ऐसा ही फिर हुआ है, दो प्लेटफ़ोर्मों के बीच चली आ रही Roasting की इस जंग में Kunal kamra ने एक नया पन्ना जोड़ दिया है।

पहले तो ये कि Roasting है क्या? इन विडियो को क्यों इतना पसंद किया जाता है?

ग़ौर करेंगे तो पाएँगें, ये Roasters सिर्फ़ वो बातें ही तो करते हैं जो हम किसी चीज़ को देखकर बोलना तो चाहते हैं, लेकिन मन में ही रखें रहतें हैं, इसके अपने कारण है और शायद जायज़ भी। ये Roaster बस वहीं बातें सार्वजनिक प्लेटफ़ोर्म पर बोल/कह देते हैं।

Carry Minati भी इसलिए पॉप्युलर है, बहुत से लोग जिन विडियो/चीज़ों को देख, जो बातें मन में कहतें हैं, Carry उन्हीं बातों को YouTube पर। इसलिए बहुत से वैसे लोग Carry से कनेक्ट कर पाते हैं।

लेकिन हर कोई एक सा कहाँ होता है? अगर बहुत से लोग ऐसे हैं, जो किसी चीज़ को देखकर Carry जैसा मत रखते हैं, तो ज़ाहिर है कुछ ऐसे भी होंगें जो उससे अलग मत रखतें होंगें, जैसे Kunal Kamra

बहुत लोगों को Carry का TikTok को Roast करने वाला विडियो पसंद आया, लेकिन कुछ YouTubers ऐसे भी थे, जिन्होंने उस विडियो की कुछ बातों को सही नहीं पाया और अपनी राय सीधे शब्दों में रख दी। Kamra भी शायद यही कर सकतें थे, लेकिन उन्होंने किसी की Roasting अच्छी न लगनें पर Roasting से ही जवाब दे दिया। सोच होगा कि Roasting का गुर सिखाएँगें, लेकिन शायद Roasting की दुनिया में भी उनकी उड़ान पर अब कुछ दिनों की पाबंदी सी लगा दी गयी है, वो भी इस बार तरीक़ा अधिकारिक न सही, लेकिन आक्रामक ज़रूर है। सही-ग़लत आप अपनी सोच से तय करें।

वैसे भी, मैं कोई Roasting की मर्यादा का पाठ पढ़ानें नहीं आया, क्योंकि अब Roasting Videos की स्क्रिप्ट लिखते वक़्त मर्यादा को कहीं साइड में रख दिया जाता है, अच्छा लगे या बुरा लेकिन यही चल रहा है।

ख़ैर! एक बात ज़रूर कहूँगा, एक सीमित मात्रा में ये चलना भी चाहिए, बीच-बीच में लोगों के मन में दबी भावनाओं को भी सार्वजनिक मंचों पर जगह मिले, लेकिन थोड़े से फ़िल्टर के साथ। क्योंकि ‘मन की बात’ को नापतौल कर बोला जाना, बोलनें वाले के लिए फ़ायदेमंद भी रहता है, और असल ‘मन की बात’ मन में बनी रहकर अपना मतलब भी सार्थक रखती है। 😉

amicableashutosh@gmail.com'

Co-Founder & Editor-In-Chief
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