June 3, 2020
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lockdown

आप गलत समझ रहे हैं, इन्होनें इस वक़्त हाथों में देश की अर्थव्यवस्था का भार उठाया है 

आप गलत समझ रहे हैं, इन्होनें इस वक़्त हाथों में देश की अर्थव्यवस्था का भार उठाया है। और नहीं तो क्या! आप तो घर-बैठ कर न ही जमीन जायदाद खरीद रहें हैं, न गाड़ियाँ, न ही और ज्यादा कुछ।

ऐसे में ये बेचारे आज मौका मिलते ही देश को मंदी से बचाने के इरादे से उतर पड़े मैदान में। फिर क्या जहां देखों लंबी लंबी कतारें और आँखों में टैक्स के जरिये सरकार की झोली भरने का जज़्बा।

जी हाँ! 4 मई से कन्टेनमेंट एरिया को छोड़ बाकी सभी ज़ोन्स में कुछ पाबंदियों के साथ ‘वाइन शॉप’ खोलने की इजाजत दे दी गयी है।

किसको पता था कि एक दिन जब केंद्र और राज्य सरकारों के पास कमाई का कोई जरिया नहीं रहेगा तब वह इन्हीं तमाम लड़खड़ाते पैरों और कंधों के सहारे देश को आर्थिक पैमाने पर मजबूती से ख़ड़े रखने के प्रयास करेंगी।

खैर! आप भी जिन्हें अक्सर शराबी कहकर धिक्कार देते थे, उनको फिलहाल धन्यवाद कहिये क्योंकि अगर आप सरकारी नौकर भी हैं तो अब आपकी तनख्वाह के लिए सरकार को अभी सबसे अधिक पैसा यहीं लोग दे रहें हैं।

हालात ये है कि राजस्थान, पश्चिम बंगाल, हरियाणा जैसी तमाम राज्य सरकारें शराब पर टैक्स बढ़ाने पर भी सोच रहीं हैं, ताकि कमाई को बढ़ाया जा सके।

चलते चलते इतना जरूर बता दूँ, ये पोस्ट किसी को सही या गलत साबित करने के लिए नहीं लिखा गया है, क्योंकि मौजूदा समय में ये सिर्फ एक सच है और हालात ऐसे हैं कि सरकारों को भी सही-गलत के तर्क से परे इस ‘सच’ के साथ ही खड़े होना पड़ रहा है।

वैसे हरिवंश राय बच्चन साहब की एक लाइन आज बड़ा सुनने को मिली;

“बैर बढ़ाते मंदिर मस्जिद, मेल कराती मधुशाला..!”

amicableashutosh@gmail.com'

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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