August 2, 2020
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अनुभवों को बाँट कर खुद को पहचाननें के लिए सटीक प्लेटफार्म हैं ‘Meta’

कभी रोजगार तो कभी किसी और कारण से, एक दूसरे से दूर होते जा रहें लोगों को आज कल टेक्नोलॉजी और इंटरनेट मिलकर थोड़ा पास लाते नजर आते हैं। हालाँकि यह भी पूरी तरह तो सच नहीं है, लेकिन इतना जरुर है, कि आज का एक बड़ा सच यही है।

ताजा उदाहरण ही लेते हैं, मौजूदा लॉकडाउन में भी बहुत से लोग व्यक्तिगत जीवन में अपनों से दूर रह कर भी उन्हें जुड़े रहने के लिए WhatsApp के विडियो कॉलिंग जैसे कई अन्य ऐप्स और उनकी सुविधाओं का इस्तेमाल करते नजर आये। 

लेकिन असल में कभी सोचा है, कि इंसान एक-दूसरे से इतना जुड़ना, बातें करना, अनुभव बाँटना आदि सब क्यों करता है, और क्यों इन सब चीज़ों को अहमियत देते हुए इस दिशा में बढ़ती तकनीक और इंटरनेट सुविधाओं को बढ़ावा दे रहा है? दरसल इंसान होने की सबसे बड़ी खूबसूरती होती है, हमेशा सीखतें रहने की प्रवृत्ति। लेकिन यहाँ सीखतें रहने से मेरा मलतब किसी विशेष Skill या Tool को सीखनें से नहीं, बल्कि अपने और दूसरों के अनुभवों से कुछ अहम बातें सीखतें हुए, अपनी इस जिंदगी को और बारीकी से समझनें का है। 

लेकिन आजकल की एक सामान्य ज़िन्दगी में वक़्त है क्या आपके पास, लोगों से मिलनें का? अपने अनुभव उनसें बाँटनें का? या उनके अनुभवों को तसल्ली से सुन पानें का? अगर ईमानदारी से कहें तो नहीं, और इसमें सबसे बड़ी अड़चन ये है कि पहले तो हमारें आसपास कम ही ऐसे लोग होतें हैं, और यकींन मानिए जब बात अनुभवों की हों तो वह अगर आपके आसपास जाननें वालों के बजाये, आपके नेटवर्क से बाहर किसी व्यक्ति का हो, तो वह आपके लिए भी और दिलचस्प बन जाता है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि आपके आसपास अधिकतर आप जैसी ही ज़िन्दगी जी रहें लोग होतें हैं, एक जगह, एक तरह की समस्याएं और लगभग एक जैसे अनुभव। लेकिन किसी और जगह के, किसी और क्षेत्र से जुड़ों लोगों के जिंदगियों के किस्सों, उनकी बातों, उनकी भावनाओं या व्यापक तौर पर उनकें अनुभवों को जाननें और उस विषय को और कई अन्य लोगों के साथ इत्मिनान से साधने का मौका मिले तो किसको पसंद नहीं आएगा। 

तो आपके लिए ऐसा ही एक मौका लेकर आया है ‘Meta‘, जी हाँ! एक ऐसा प्लेटफार्म या कहें तो ज़िन्दगी के मायनों को तलाशनें वाली एक उत्सुक कम्युनिटी, जहाँ आप खुद को और भी बेहतर तरीकें से जाननें का मौका पा सकतें हैं। 

इस प्लेटफ़ॉर्म या सोशल नेटवर्क में खुलें विचारों के लोग न सिर्फ अपने विचार साझा करते नजर आतें हैं, बल्कि वह दूसरे के विचारों और अनुभवों को भी उतनी ही ललक से सुनतें हैं, उन्हें समझनें की कोशिश करते हैं, उनकें मौजूदा हालातों को समझ उनकें साथ सहानुभूति तक साझा करते हैं।

पर आप सोच रहें होंगें ऐसा करने के पीछे Meta का मकसद क्या है? सवाल पूछा भी जाना चाहिए। दरसल Meta अपनी इस बेहद शानदार कम्युनिटी के जरिये मौका देता है सभी को इंसानी जिंदगियों के असल मायनों को तलाशनें और समझनें का, ताकि इस अनमोल कहीं जानें वाली ज़िन्दगी की बहुत सी कभी न पलटी गयी परतों को भी आप पलट सकें। 

meta

इस प्लेटफार्म पर आपको एक ओर जहाँ ‘मन में विचार कैसे पैदा होतें हैं?’. ‘हमारे विचारों को आसपास का वातावरण कितना प्रभावित करता है?’, ‘हम इन मस्तिष्क तरंगों को कैसे नियंत्रित कर सकते हैं?’ जैसे तमाम  सवाल और उनकें रचनात्मक और सटीक जवाब मिलेंगें, वहीँ दूसरी ओर यह प्लेटफार्म धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों और कोई शोर्ट टर्म समस्याओं जैसे ‘डिप्रेशन को कैसे दूर करें?’ आदि जैसे पारंपरिक सवालों से बचाता हुआ अपनी एक अलग पहचान और ऊर्जा स्थापित करता नजर आता है। ऐसा इसलिए भी ताकि प्लेटफार्म पर एक सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे और लोगों को इस प्लेटफार्म पर मानसिक सुकून का अनुभव तो हो ही, साथ ही साथ वह यहाँ अपने एक बेहतर स्वरुप को तलाश भी सकें।

असल में इस प्लेटफार्म पर किसी भी विषय पर चर्चा तब शुरू होती है, जब कोई व्यक्ति कुछ व्यापक अनुभव करता है, और उसी अनुभव से जुडें कुछ सवालों का जवाब तलाशनें और उसको साधने के लिए वह प्लेटफार्म पर पोस्ट करता है और फिर उसी अनुभव को साझा करने वाले या उसके विपरीत अनुभव को जी चुके लोग उनके पोस्ट पर अपने विचार देते हैं। और ऐसे ही शुरुआत होती है एक सामुदायिक चिंतन की, जहाँ आम तौर पर कुछ चर्चाओं में लोग एक समान निष्कर्ष तक पहुँचते भी नजर आतें हैं, जिससे लोगों के बीच भी उत्साह बढ़ता है

और तब कहीं आपको जाकर लगता है कि आपनें उन लोगों से बात की जो आपकी बातों, उसके पीछे के विचारों व अनुभव को समझ रहें हैं, उन बातों को, जिन्हें आप हमेशा से ही कुछ चंद ऐसे लोगों से बाँटना चाहतें थे

लेकिन आपको पता है, इस प्लेटफार्म पर आप इतनी आसानी से अपनी बात कैसे रख पातें हैं? दरसल यह चीज़ इस प्लेटफार्म की कुछ बड़ी खासियतों में से एक है, असल में आप इस प्लेटफार्म पर अपनी असली पहचान को छुपाए रख, बेझिझक अपनें विचारों को प्रकट कर सकतें हैं, जो यक़ीनन बहुत से लोगों की ख्वाहिश भी होती है

तो देर किस बात कि आप भी जुड़िये एक ऐसे प्लेटफार्म से जो किसी ‘मैं’ की बजाएं ‘हम’ की भावना के साथ ही साथ अनुभवों को भी प्राथमिकता देता है

amicableashutosh@gmail.com'

Co-Founder & Editor-In-Chief
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