August 3, 2020
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लॉकडाउन के चलते हर 3 में से 1 स्टार्टअप आंशिक रूप से बंद या बंद होनें के कगार पर: Nasscom रिपोर्ट

इस बात को समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि इस मौजूदा COVID-19 महामारी के समय सभी तरह के बिज़नेस काफी प्रभावित हुए हैं, और प्रभावित से मलतब साफ़ है, बुरा प्रभाव। इतना जरुर है कि हम पहले भी आपको जैसा बताते रहें हैं कि कुछ क्षेत्रों को इस COVID-19 के चलते हुए लॉकडाउन आदि का फायदा भी मिला है, जैसे विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म, ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफार्म, म्यूजिक इंडस्ट्री आदि।

लेकिन इन क्षेत्रों को उँगलियों में गिना जा सकता है, क्योंकि बाक़ी के क्षेत्र जैसे होटल इंडस्ट्री, ऑनलाइन पेमेंट, ट्रेवल इंडस्ट्री, ई-कॉमर्स, कैब सर्विस, रिटेल, मैन्युफैक्चरिंग, मोबाइल इंडस्ट्री, आईटी इंडस्ट्री, लांड्री इंडस्ट्री, ग्रूमिंग क्षेत्र, क्लाउड किचन, ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी, रेस्टोरेंट आदि इतने खुशनसीब नहीं रहे, और लॉकडाउन की मार इन क्षेत्रों पर कुछ ऐसी पड़ी कि मानों इनमें से कई के बंद जैसे होने के हालात आ गये।

लगातार हम बड़ी बड़ी कंपनियों से लेकर बड़े स्टार्टअप्स आदि में भी छटनी की खबरें सुन रहें हैं, कहीं Uber अपने करीब 6,700 कर्मचारियों को निकाल रहा है, तो Zomato करीब 500, Swiggy करीब 1100, WeWork India लगभग 100, Livspace करीब 450 और ShareChat 101 के करीब कर्मचारियों की छटनी करने का ऐलान कर चुकें हैं।

देश में MSMEs, SMEs से लेकर स्टार्टअप एकोसिस्टम तक की हालात काफी नाजुक है और इसका प्रमाण अब Nasscom की Startup Pulse Survey रिपोर्ट से भी देखने को मिल रहा है। इस रिपोर्ट के मुताबिक देश में करीब हर तीन में से एक स्टार्टअप फ़िलहाल या तो अस्थायी रूप से संचालन बंद कर चुका है, या COVID-19 संकट से बहुत बुरी तरह प्रभावित होने के चलते बंद होने के कगार पर है।

स्टार्टअप्स के खर्चों में कटौती

Nasscom की इस Startup Pulse Survey से पता चलता है कि 70% स्टार्टअप के पास अब फ़िलहाल सिर्फ तीन महीनें से कम का संचालन करने लायक पूंजी बची हुई है, और मौजूदा समय में फंडिंग आदि को लेकर भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है, क्योंकि इस रिपोर्ट की मानें तो 65% स्टार्टअप्स के अनुसार उन्हें फंडिंग मिलनें में खासी दिक्कत हो रही है।

टेक्नोलॉजी स्टार्टअप की दशा ये है कि Nasscom की रिपोर्ट के अनुसार 10 में से 9 भारतीय स्टार्टअप राजस्व में गिरावट दर्ज कर रहें हैं, और तीन महीनें या कुछ और महीनें में उनके सामने कंपनी को बंद करने के सिवा कोई और विकल्प मौजूद न रहे।

लेकिन इसमें भी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं मध्य स्तर के वो स्टार्टअप्स, जो सीधा उपभोक्ता आधारित व्यवसाय करते हैं। रिपोर्ट के अनुसार सभी बिज़नेस टू कंज्यूमर (B2C) स्टार्टअप, जो करीब कुल स्टार्टअप एकोसिस्टम में 60% तक की हिस्सेदारी रखते हैं, वह बंद होने की स्थिति में आने वाले हैं। सर्वे में जिस बात में स्टार्टअप ने सबसे ज्यादा चिंता व्यक्त की वह यह कि मौजूदा हालातों को देखते हुए इस स्थिति में जल्द सुधार होने की भी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है, और उनका मानना है कि बिज़नेस पर COVID-19 का प्रभाव आने वालें 12 महीनें तक किसी न किसी रूप में बना रहेगा।

घटता राजस्व

आइये आपको इस सर्वे का आधार बता दें। दरसल Nasscom ने यह रिपोर्ट दो महीने तक चलने वाले अपने सर्वे के आधार पर दी है, जिसमें सभी सेक्टरों से 250 से अधिक स्टार्टअप्स ने अपना अपना फीडबैक दिया। परेशान करने वाली बात यह रही कि इन सभी में से करीब 92% स्टार्टअप्स ने राजस्व में गिरावट दर्ज करने की बात स्वीकार की।

साथ ही साथ रिपोर्ट के दावे के अनुसार आधे से अधिक स्टार्टअप ने कहा कि वे नए बिज़नेस अवसरों की ओर रुख करने लगें हैं, जिनमें उनको स्वास्थ्य सेवा और टेक्नोलॉजी जैसे आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्र काफी आकर्षक नजर आ रहें हैं।

और इतना ही भी साफ़ है कि स्टार्टअप तंत्र अब संकट के दौरान सरकार द्वारा समर्थन मिलने की राह देख रहा है। दरसल 70% स्टार्टअप्स ने कहा कि वह विनियमों को आसान बनाने और स्टार्टअप से सरकारी खरीद शुरू करने जैसे अवसरों की माँग कर रहें हैं।

वहीँ करीब 50% स्टार्टअप्स तो तत्काल रूप से निर्धारित लागतों पर सरकार द्वारा पूंजी समर्थन (प्रतिपूर्ति) की माँग कर रहें हैं। लेकिन दिलचस्प यह है कि Nasscom ने भी इस रिपोर्ट में सरकार के सामनें देश के स्टार्टअप एकोसिस्टम को समर्थन देने और फंडिंग आदि को लेकर सहूलियतें प्रदान करने के लिए कुछ सिफारिशों की पेशकश की है।

Nasscom ने फाइनेंसियल पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट को लेकर सरकार से स्टार्टअप क्षेत्र को समर्थन देने की भी सिफारिशें की है। जाहिर है देश में COVID-19 महामारी और दो महीने के लंबे लॉकडाउन के चलते ये सभी स्टार्टअप्स काफी प्रभावित हैं, खासकर अगर हम बात करें, ट्रेवल, होटल खुदरा जैसे क्षेत्रों की तो।

स्टार्टअप्स की माँग

इसके साथ ही Nasscom ने सरकार को यह भी सलाह दी है कि इन स्टार्टअप्स के लिए एक डीप-टेक इनवेस्टमेंट फंड बनाया जाए, और गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST ) को कम करके भी इन स्टार्टअप्स को वित्तीय राहत दी जाए। साथ ही साथ सरकार को टैक्स रिफंड में भी तेजी लायी जानी चाहिए।

Nasscom के अध्यक्ष देबजानी घोष ने एक बयान में कहा;

“यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारतीय स्टार्टअप अपने संचालन और विकास की पटरी से मौजूदा हालतों के चलते न उतर जाएँ, इसके लिए जरूरी है कि अब स्टेकहोल्डर्स सामनें आयें और स्टार्टअप्स भी मदद करें। साथी ही सरकार के लिए भी हमारे कुछ सुझाव हैं जैसे वर्किंग कैपिटल, नियामक आदि में ढील, फाइनेंसियल पॉलिसी और फंडिंग सपोर्ट आदि जैसे उपायों के साथ सामने आये।”

दिलचस्प यह है कि इस रिपोर्ट में ऐसे भी कुछ स्टार्टअप्स का जिक्र हैं, जिनमें मौजूदा लॉकडाउन के हालातों के चलते नाटकीय वृद्धि देखने को मिली। उदाहरण के लिए ऑनलाइन एजुकेशन प्लेटफार्मों ने राजस्व में 14% तक की वृद्धि दर्ज की, जो स्वाभाविक तौर पर अपेक्षित भी था।

साथ ही साथ बिज़नेस टू बिज़नेस (B2B) सेवा आधारित स्टार्टअप्स भी तुलनात्मक रूप से राजस्व में कम गिरावट दर्ज करते नजर आये।

लेकिन दिलचस्प यह है कि इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के आधार पर 9,300 टेक्नोलॉजी स्टार्टअप जो करीब 400,000 लोगों को निरोजगार देते हैं, वह फ़िलहाल इस मुश्किल घड़ी में अपनी 54% क्षमता के साथ ही लड़ते नजर आ रहें हैं।

हालाँकि एक और दिलचस्प पहलु यह भी है कि इस सर्वे के अनुसार 50% ने अधिक स्टार्टअप बड़ी कंपनियों और बैंकों के साथ भागीदारी करना चाहतें हैं, जिससे उन्हें लोन तक आसानी से पहुँच या फिर सीधे वित्तीय सहायता मिल सके और वह इस आर्थिक संकट में भी खुद को अस्तित्व को बरक़रार रख सकें।

बात लोन की चली है तो हाल ही में सरकार द्वारा राहत पैकेज के तहत घोषित की गयी MSMEs की नयी परिभाषा और बिना गारंटी वाले लोन आदि सुविधाओं के तहत विशेषज्ञों के अनुसार स्टार्टअप्स को कोई बड़ा फायदा मिलता नहीं दिखाई दे रहा है।

दरसल सर्कार के इस पैकेज का सबसे दिलचस्प पहलु था छोटे व्यवसायों को सरकारी गारंटी के तौर पर 3 लाख करोड़ रुपये के Collateral-Free (बिना गारंटी वाले) लोन की सुविधा। आपको बता दें सरकार के नियमों के हिसाब से सबसे अधिक प्रभावित उद्योग क्षेत्रों को 20,000 करोड़ रुपये का डेबिट फंड और इक्विटी सपोर्ट प्रदान करने के लिए 50,000 करोड़ रुपये का फंड पेश किया गया गया।

इतना ही नहीं बल्कि वित्तमंत्री, निर्मला सीतारमण ने MSMEs की परिभाषा को भी बदलते हुए थोड़ी राहत की पेशकश की। उदाहरण के लिए पहले तो MSMEs में निवेश की सीमा को बढ़ा दिया गया और साथ ही साथ इनके टर्नओवर को लेकर भी नयी लिमिट जोड़ी गईं हैं।

लेकिन क्या आपको पता है इसका सबसे बड़ा फायदा क्या होगा, दरसल जानकार मानतें हैं कि इस कदम से MSMEs को जो सरकारी प्रोत्साहन मिलता है वह इनके टर्नओवर और निवेश की लिमिट के बढ़ने के बाद भी मिलता रहेगा, जिससे MSMEs आसानी से थोड़े बड़े स्तर पर बिज़नेस का संचालन कर पायेंगें, वह भी बिना सरकारी प्रोत्साहन खोये।

लेकिन अगर स्टार्टअप के संदर्भ में बात करें तो इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स शायद ही सरकार की इस Collateral-Free लोन वाले  3 लाख करोड़ रूपये के बड़े ऐलान का फायदा उठा सकें?

स्टार्टअप पर प्रभाव

लेकिन ऐसा क्यों कहा जा रहा है? दरसल घोषणा के अनुसार बिज़नेस बैंकों और गैर-बैंकों से उनके बकाया लोन का 20% तक लोन पुनः ले सकतें हैं। पर इस सुविधा का फायदा वहीँ कंपनियां उठा पायेंगी जिनके बकाया लोन की राशि 25 करोड़ रूपये या उससे अधिक हो और साथ ही साथ कंपनी का टर्नओवर भी 100 करोड़ रूपये तक हो। ऐसे में यह नियम स्टार्टअप्स के गले की फांस बन सकतें हैं।

ईटी की रिपोर्ट के हवाले से जानकारों के अनुसार ज्यादातर स्टार्टअप्स सामान्य दिनों में भी लोन हासिल करने में काफ़ी चुनौती का सामना करतें हैं, खासकर राज्यों के मालिकाना हव वाली वित्तीय संस्थानों से जो उन्हें भारी संपत्ति गिरवी रखनें पर मजबूर करतीं हैं और कंपनी के राजस्व में लाभ कमानें की स्थिति में ही उन्हें लोन देना चाहती हैं। इसके चलते अधिकतर स्टार्टअप तो इक्विटी के सहारें फंडिंग आदि जमा करके ही वर्किंग कैपिटल का जुगाड़ करते रहतें हैं। इसलिए इन नियमों में उनका खरा उतर पाना थोड़ा मुश्किल ही नजर आता है?

हालाँकि आत्मनिर्भर भारत योजना के ऐलान में सरकार द्वारा स्थानीय उत्पादों की सोर्सिंग को प्रोत्साहन देने के लिए सरकारी टेंडरों में 200 करोड़ रुपये तक के सभी टेंडरों को केवल देश आधारित कंपनियों को ही देने का फैसला लिया गया है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि ऐसी और तमाम ऐसी और भी छोटी बड़ी मौजूदा और आगामी योजनाओं से स्टार्टअप जगत को उबरनें में कितनी मदद मिल पाती है?

इस बीच आप Techसंवाद के साथ बनें रहें, ताकि आगामी समय में भी सरकार द्वारा दिए जानें वाली योजनाओं और उनके तमाम पहलुओं से हम आपको रूबरू करवाते रहें!

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