साल 2020 की शुरुआत में भारत पेश कर सकता है नई ‘e-Commerce पॉलिसी’

देश में ई-कॉमर्स नीतियों को लेकर नई संभावनाओं को लेकर चर्चा काफी समय पहले से ही शुरू हो चुकी है। और इन्हीं संभावनाओं को अब सरकार नए साल में हकीकत की शक्ल देने जा रही है। 

दरसल इंटरनेट में एक पोर्टल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि सरकार चालू वित्त वर्ष में ही नई ई-कॉमर्स नीतियों को पेश कर सकती है, हालाँकि समय को लेकर अभी भी ठोस स्तर पर कुछ नहीं कहा जा सकता है।

Department for Promotion of Industry & Internal Trade के सचिव, गुरु प्रसाद महापात्रा ने IANS से बातचीत के दौरान कहा;

“ई-कॉमर्स बिल का मसौदा तैयार हो चुका है। हमने अभी-अभी स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन शुरू किया है। Nasscom और CII सहित कई लोग पहले ही अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं।”

“ऐसे में हम यह कोशिश कर रहें हैं कि जल्द से जल्द देश में नई ई-कॉमर्स नीतियों के साथ नई संभावनाओं की तलाश की जा सके। ऐसा इसलिए क्यूंकि आज के समय में यह क्षेत्र और इससे जुड़ी पॉलिसी बेहद मायने रखती हैं।”

उन्होनें यह भी कहा कि इस क्षेत्र में एक सबसे महत्वपूर्ण पहलु है, और वह है कमर्शियल डेटा और ई-कॉमर्स क्षेत्र में ऐसे डेटा की बड़ी भरमार है। इसलिए सरकार हड़बड़ी में कोई भी कदम नहीं उठाना चाहती है, और इसलिए इसको चालू वित्त वर्ष में ही पेश करने का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन कोई निश्चित अवधि का जिक्र नहीं किया गया है।

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इसके साथ ही आपको बता दें कि हाल ही में आईटी मंत्रालय ने केंद्रीय कैबिनेट में डेटा प्राइवेसी बिल को भी पेश किया था, जिसे मंजूरी दी गई थी, जिसमें व्यक्तिगत डेटा प्राइवेसी भी शामिल है।

दरसल ग्राहकों के व्यक्तिगत डेटा को दुनिया भर में प्राइवेसी कानूनों द्वारा संरक्षित किया गया है और अब इस भारतीय बिल में भी लगभग यही चीज़ नज़र आती है, वहीँ गैर-व्यक्तिगत डेटा (NPD) काफी हद तक अभी भी अनियमिता से जूझ रहा है।

आपको बता दें NPD में ई-कॉमर्स डेटा, मौसम के ऐप द्वारा एकत्र किए गए मौसम रुझान, या कैब एग्रीगेटर द्वारा एकत्रित कम्यूटर पैटर्न, या किसी विशेष क्षेत्र के खाने के पैटर्न जैसे अज्ञात डेटा शामिल होते हैं।

महापात्र ने यह भी कहा कि आईटी मंत्रालय ने अज्ञात डेटा पर डेटा स्थानीयकरण पर एक अलग समिति बनाई थी और इसमें देश के डेटा को विदेशों में स्टोर करने जैसे तमाम मुद्दों को लेकर चिंतन भी किया जा रहा है।

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दरसल ई-कॉमर्स के डेटा रेगुलेशन में एक जो सबसे बड़ी दिक्कत है वह यह कि इसमें आईटी, खुदरा, भुगतान और उपभोक्ताओं जैसी सभी डोमेन शामिल नज़र आती हैं।

दरसल DPIIT का मानना ​​है कि देश में ई-कॉमर्स डेटा के स्थानीयकरण और इसे भारतीय स्टार्टअप के लिए सुलभ बनाने की दिशा में काम करने से काफी लाभ होगा।

वहीँ इस बीच कई मंत्रालय अपने स्वयं के ई-कॉमर्स नियमों पर काम कर रहे हैं। हालांकि, आईटी मंत्रालय और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने ई-कॉमर्स कंपनियों के रेगुलेशन को लेकर अपने स्वयं के नियमों को लागू करने के लिए समानांतर परामर्श की भी शुरुआत की है।

जबकि MeitY या IT मंत्रालय ने गैर-व्यक्तिगत डेटा को रेगुलेट करने के लिए एक पैनल का गठन किया है, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने भी उपभोक्ता संरक्षण के लिए दिशानिर्देश तैयार किए हैं।

आपको भी शायद अंदाज़ा को कि ये विभाग उद्योग और आंतरिक व्यापार के मसौदे संबंधी राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति में अहम रोल अदा करते हैं। हालाँकि DPIIT के तहत ही नई ई-कॉमर्स नीतियों का अनावरण किया जाना तय है।

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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