August 8, 2020
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UPI-April-2020

UPI लेनदेन को लेकर NPCI जल्द ही थर्ड पार्टी पेमेंट प्लेटफ़ॉर्मो पर लगा सकता है लिमिट: रिपोर्ट

नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) जल्द ही UPI लेनदेन पर किसी भी थर्ड पार्टी की निर्भरता को सीमित करने के तरीकों पर विचार करता हुआ नज़र आ रहा है।

इस मामले से जुड़े हुए लोगों का कहना है कि किसी भी सिंगल पेमेंट कंपनी के लेनदेन के शेयर को सीमित करके ऐसा किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है।

आपको बता दे कि NPCI एक गैर लाभकारी संगठन है जो मुख्य रूप से UPI को संचालित करता है और UPI इसके अधीन भी है या यूं कहें तो NPCI के देखरेख में भी सबकुछ संभव है।

इसके साथ ही वर्तमान परिस्थिति में UPI लेनदेन के मामले में मुख्य रूप से Google Pay, Paytm, Walmart स्वामित्व वाली कंपनी PhonePe और Amazon Pay का पूर्ण रूप से दबदबा कायम है और इन कंपनियों ने करीब 90 प्रतिशत मार्केट शेयर पर नियंत्रण कायम किया हुआ है।

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक NPCI आने वाले समय में पूरे मार्केट शेयर का 33 प्रतिशत हिस्सा लेनदेन के हिस्से के रूप में सीमित कर सकता है। मुख्य रूप से UPI के इकोसिस्टम को मजबूत और प्रोत्साहित करने के लिए ऐसा किया जा सकता है।

पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा शुरू हो गई है कि NPCI ने पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर बैंको, UPI की संचालन समिति के सदस्यों और थर्ड पार्टी कंपनियों से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है और इसके लागू करने के लिए अधिकार क्षेत्र और इसकी चुनौतियों के बारे में चर्चा शुरू कर दी है।

कुछ लोगों का कहना है कि जिन तरीकों पर विचार किया जा रहा है उसमें मुख्य रूप से लागू होने के पहले वर्ष के दौरान लेनदेन की हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा फिर अगले दो वित्तीय वर्षों में इसे क्रमशः 40 प्रतिशत और फिर 33 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा।

अगर किन्हीं कारणों से लेनदेन की सीमा में किसी भी प्रकार का उल्लंघन होता है तो वैसी परिस्थिति में NPCI कंपनी को चेतावनी के तौर पर नए उपभोक्ता के आने पर रोक और नए लेनदेन को बंद भी कर सकता है। अगर इतने पर बात नहीं बनती है तो जुर्माना भी लगाया जा सकता है।

इसपर अभी बातचीत जारी है और NPCI ने किसी भी प्रकार की आधिकारिक सूचना नहीं दी है और न ही कोई दिशा निर्देश दिए है कि कैसे इसे लागू किया जाएगा।

PhonePe के फाउंडर और सीईओ समीर निगम ने अपने लिखित बयान में कहा कि कल्पना कीजिए कि आपके पेमेंट को मार्केट कैप की वजह से दूसरे कंपनियों में भेज दिया जाता है जो कंपनी के नियंत्रण में भी नहीं है। वैसी परिस्थिति में कंपनी अपने ग्राहक को खो देंगे क्योंकि उसके बाद कोई भी लेनदेन संभव नहीं हो पाएगी।

UPI को साल 2016 में लॉन्च किया गया था। यह वही साल था जब भारत सरकार ने बड़े नोटों के सर्कुलेशन पर रोक लगा दी थी और विमुद्रिकरण हुआ था। उसके बाद से यह विश्व का एक तेज़ी से बढ़ता हुआ रिटेल पेमेंट सिस्टम बन गया।

जून के महीने में इस सिस्टम पर रिकॉर्ड 1.34 बिलियन ट्रांजैक्शन देखने को मिले। इसके साथ ही आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक 29 जुलाई तक कुल 1.37 बिलियन ट्रांजैक्शन संभव हो पाया जो जून के रिकॉर्ड को भी तोड़ कर आगे बढ़ गया।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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