June 1, 2020
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देश में Ola, Uber जैसी कंपनियों में कर्मचारियों के लिहाज़ से ‘वर्किंग कंडीशन’ सबसे ख़राब

इस बात में कोई शक नहीं है कि देश में तकनीकी स्टार्टअप्स तेजी से अपनी जगह बनाते हुए, बड़े-बड़े निवेश हासिल कर अपना प्रसार कर रहें हैं।

लेकिन शायद देश के कई नामी स्टार्टअप्स अपने प्रसार के चलते अपन कर्मचारियों के लिए सही स्थितियों को स्थापित करना ही भूल गये हैं। जी हाँ! और ऐसी कंपनियों में इतने बड़े नाम तक शुमार हैं, जिन्हें सुनकर शायद आपको भी हैरानी हो।

दरसल देश के नामी ऑनलाइन कैब, होटल, फ़ूड बुकिंग एवं डिलीवरी स्टार्टअप के अधिकांश कर्मचारियों में ड्राईवर और डिलीवरी करने वाले कर्मचारी शुमार हैं। और भले ही ये कंपनियां अपना प्रसार तेजी से कर रही हों और जनता के बीच लोकप्रिय हो रहीं हों, लेकिन इन कर्मचारियों पर इन कंपनियों ने धीरे धीरे अपना ध्यान हटा दिया सा लगता है।

और यह बात अब खुले तौर पर सबके सामने आने लगी है। दरसल हाल ही में हुए एक अध्यन के मुताबिक भुगतान, कंडीशन, मैनेजमेंट, कॉन्ट्रैक्ट और रिप्रजेंटेशन जैसी पांच चीज़ों को आधार बनाते हुए इन कंपनियों को 1 से 10 के स्केल पर पॉइंट आवंटित किये गये।

इसमें जहाँ Ola, Uber और Foodpanda जैसी कंपनियो को 10 में 2 पॉइंट ही मिले। वहीँ Rapido और UberEats को भी महज़ 3 पॉइंट मिले।

प्लेटफ़ॉर्मस्कोर 

Flipkart7

Dunzo5

BigBasket5

Zomato

Swiggy4

UrbanClap4

Housejoy4

Rapido3

UberEats3

Uber2

Ola2

FoodPanda

जैसा कि हम इस लिस्ट में देख सकतें हैं कि जहाँ Flipkart इस श्रृंखला में 7 अंकों के साथ टॉप पर है, वहीँ Zomato और Swiggy जैसी कंपनियां भी आधे अंक तक हासिल नहीं कर सकीं हैं। ऐसे में देखना यह दिलचस्प होगा की इस रिपोर्ट के सार्वजानिक होने के बाद अब ये कंपनियां अपनी स्थितियों में सुधार के लिए कैसे कदम उठातीं हैं।

इस बीच हम आपको बता दें कि इन सभी कंपनियों में से किसी में भी लेबर यूनियन जैसी चीज़ें मौजूद नहीं है। हालाँकि महज़ तीन कंपनियों Flipkart, Zomato और Swiggy में ही कर्मचारियों की समस्याओं को मैनेजमेंट तक पहुँचाने जैसे समाधान मौजूद हैं।

amicableashutosh@gmail.com'

नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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