July 2, 2020
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इंटरनेट पर फैली ‘Google Pay’ के बैन होने की फ़ेंक न्यूज़; जानिए असल में RBI ने दिल्ली हाईकोर्ट से क्या कहा?

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने दिल्ली उच्च न्यायालय को यह बताया है कि Google Pay एक थर्ड पार्टी ऐप प्रोवाइडर (TRAP) है और यह किसी भी भुगतान प्रणाली को संचालित नहीं करता है।

मुख्य रूप से इसी वजह से इसका संचालन पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत उल्लंघन नहीं है। और इसलिए यह वैधता से अपना संचालन कर रहा है। आरबीआई ने चीफ़ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जलान की पीठ को यह जानकारी दी।

आरबीआई ने अदालत को यह भी बताया कि चूंकि Google Pay कोई भुगतान प्रणाली संचालित नहीं करता है इसलिए उसे नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा प्रकाशित अधिकृत भुगतान प्रणाली ऑपरेटरों की सूची में भी जगह नहीं मिलती है।

आरबीआई का जवाब वित्तीय अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा द्वारा किया गया जनहित याचिका में आया जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया है कि Google का मोबाइल भुगतान ऐप, Google Pay आरबीआई से अपेक्षित प्राधिकरण के बिना वित्तीय लेनदेन की सुविधा प्रदान कर रहा था।

मिश्रा ने यह भी दावा किया है कि Google Pay पेमेंट्स एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट के उल्लंघन के रूप में भुगतान प्रणाली प्रोवाइडर के रूप में काम कर रहा था क्योंकि इस तरह के कार्यों को करने के लिए देश के केंद्रीय बैंक से कोई वैध प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि 20 मार्च 2019 को जारी एनपीसीआई (NPCI) की अधिकृत ‘पेमेंट्स सिस्टम्स ऑपरेटर्स’ की सूची में Google Pay का ज़िक्र भी नहीं था।

लेकिन इस बीच Twitter पर काफ़ी ख़बरें फैलनें लगीं कि RBI ने G-Pay को बैन कर दिया है, दरसल यह बहुत से डिजिटल पोर्टल की Clickbait सुर्ख़ियों की वजह से भी हुआ।

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‘मतलब G-Pay बंद?’, ‘ये सेफ़ नहीं है?’, ‘अकाउंट डिलीट कर दें क्या?’ . . कुछ दिनों से काफ़ी ऐसे मैसेज आ रहें हैं, लेकिन क्यों? हाल ही में दिल्ली हाईकोर्ट में अर्थशास्त्री अभिजीत मिश्रा ने एक याचिका डाली, कहा गया G-Pay बिना RBI की मंज़ूरी के भारत में वित्तीय सेवा दे रहा है। एक तर्क यह भी था कि 20 मार्च, 2019 को NPCI द्वारा जारी ‘Payment Systems Operators' की लिस्ट में G-Pay का नाम नहीं था। . . इस पर RBI ने कोर्ट को बताया है कि G-Pay सिर्फ़ एक Third Party App Provider (TPAP) है और कोई Payment System ऑपरेट नहीं करता है। इसलिए इसकी सेवाएँ Payment and Settlement System Act of 2007 का उल्लंघन ‘नहीं’ करती हैं और क्योंकि G-Pay कोई भी Payment System ऑपरेट नहीं करता है, इसलिए वह NPCI द्वारा जारी लिस्ट में भी नहीं था। . . इस बीच कोर्ट ने कहा है कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि इसकी सुनवाई से कई थर्ड पार्टी ऐप (TPAP) प्रभावित हो सकती हैं। और इसलिए अब इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। . . लेकिन इन सब के बीच अचानक से इंटरनेट पर सिर्फ़ अख़बारों की सुर्ख़ियाँ पढ़कर यह बात फैलाई जाने लगीं कि RBI से कोर्ट को कहा है कि G-Pay पेमेंट सेवा दे ही नहीं सकता। बता दें यह ख़बरें पूरी तरह से फेंक हैं। दरसल कोर्ट का जो भी निर्णय होगा उससे शायद देश में TPAP की परिभाषा में ही संशोधन करना पड़ जाए। . . बाक़ी हाँ! G-Pay को शायद समझ आ गया हो कि लोग उसके “Better Luck Next Time” वाली चीज़ से कितने ख़फ़ा हैं और वो बस मौक़े की तलाश में हैं। 😂 . . बाक़ी आप बिना झिझके अभी भी पूछ सकतें हैं “न हो तो Google Pay कर दूँ? 2 मिनट लगेगा!” . #googlepay #gpay #betterlucknexttime #rbi #india

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दोनों जजों की पीठ ने कहा कि इस मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है क्योंकि यह अन्य थर्ड पार्टी ऐप को प्रभावित करता है। अगली सुनवाई के लिए इसे 22 जुलाई को लिस्टेड किया गया है।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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