July 2, 2020
  • facebook
  • twitter
  • linkedin
RBI

ग्रामीण इलाक़ों में ‘डिजिटल पेमेंट’ सुविधा को मज़बूत बनाने के लिए RBI ने बनाया 500 करोड़ का फंड

भारतीय रिज़र्व बैंक ने शुक्रवार को यह घोषणा की कि उसने देश के ग्रामीण और उत्तर पूर्व जिलों में डिजिटल भुगतान पारिस्थितिक तंत्र के विकास का समर्थन और सुधार करने के लिए लगभग 500 करोड़ रुपए के Payment Infrastructure Development Fund ( PIFD) की स्थापना की है।

केंद्रीय बैंक ने कहा है कि पीआईएफडी को लगभग 250 करोड़ रुपए की प्रारंभिक योगदान भी मुहैया कराया गया है। इसके साथ ही फंड के अन्य आधे हिस्से को भी जारी करने वाली सभी बैंकों और नेटवर्क ऑपरेटरों द्वारा योगदान करने की भी उम्मीद बताई गई है।

इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ आरबीआई ने अपने प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि वर्षों से देश में भुगतान पारिस्थितिक तंत्र बैंक खातों, मोबाईल फ़ोन, कार्ड आदि जैसे विकल्पों के साथ विकसित हुआ है। आरबीआई ने यह भी कहा कि भुगतान प्रणालियों के डिजिटलाइजेशन के लिए और अधिक से अधिक भागीदारी प्रदान करने के लिए देश भर के अधिक से अधिक अनछुए क्षेत्रों में स्वीकृति प्रदान करने के लिए बुनियादी ढांचों को प्रोत्साहन देना अति आवश्यक है।

इसके अतिरिक्त, पीआईडीएफ को कार्ड जारी करने वाले बैंकों और कार्ड नेटवर्क से परिचालन खर्चों को कवर करने के लिए वार्षिक रेकरिंग योगदान भी प्राप्त होगा, जबकि आरबीआई भी समय समय पर वार्षिक शॉर्टफॉल को पूरा करने के लिए अपना योगदान प्रदान करेगा। फंड को एक सलाहकार परिषद् के माध्यम से नियंत्रित किया जाएगा और रिज़र्व बैंक द्वारा देख रेख और प्रबंधित किया जाएगा।

जैसा कि केंद्रीय बैंक द्वारा भी कहा गया  है कि पीआईएफडी का प्राथमिक उद्देश्य  टियर 3 से टियर 6 केंद्रों और पूर्वोत्तर राज्यों में भौतिक और डिजिटल दोनों तरीकों से प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) बुनियादी ढांचे को तैनात करने के लिए परिचितों को प्रोत्साहित भी करेगा।

मुख्य रूप से भुगतान कंपनियों और पारिस्थितिक तंत्र से संबंधित लोगों द्वारा पहले ही यह चिंता व्यक्त की थी कि वित्त मंत्रालय द्वारा UPI पर व्यापारी छूट और RuPay उपकरण को बंद करने के निर्णय के बाद POS मशीनों की तैनाती एक घातक प्रहार होगा।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बिना किसी मुद्रा प्रोत्साहन के बैंक और भुगतान कंपनियां अपनी मशीनों को तैनात करने और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारियों का अधिग्रहण करने के लिए अनिच्छुक होंगे। इसकी मुख्य वजह है कि इसके रखरखाव की लागत काफी अधिक है।

एमडीआर और Merchant Discount Rate भुगतान सेवा प्रदान करने के लिए व्यापारियों से बैंक का अधिग्रहण करके लिए जाने वाला शुल्क है। यह शुल्क साल 2020 के जनवरी में चुनिंदा नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा संचालित उपकरणों के लिए माफ़ कर दिया गया था।

इस फंड का निर्माण करने के बाद ग्रामीण इलाकों को एक बेहतर सेवा प्रदान होगी और इससे काफी मदद मिलने कि संभावना है। आगे आने वाले दिनों में ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान और इससे संबंधित कार्यों को बेहतर दिशा और दशा प्रदान होने वाली है।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
  • facebook

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *