June 2, 2020
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क्या लॉकडाउन के बाद ‘सेल्फ़-ड्राइविंग’ इंडस्ट्री के पास है ‘कैब-एग्रीगटर्स’ से बढ़त लेने का सुनहरा मौका?

एक तरफ देश में COVID-19 के चलते 1 महीनें से अधिक समय से चल रहे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन ने जहाँ आम जिंदगियों के साथ ही साथ व्यापार जगत को भी ठप सा कर दिया है, वहीं दूसरी ओर अब देश में लॉकडाउन के बाद हो सकने वाले परिवर्तनों की चर्चा की शुरू हो गयी है।

खास यह है कि इन परिवर्तनों में सामाजिक स्तर पर हो सकने वालें बदलावों के साथ देश के बड़े व्यापार जगत में भी हो सकने वाले संभावित और नाटकीय बदलावों की सुगबुगाहट सामने आने लगी है। ये संभावित बदलाव कई क्षेत्रों में कई तरह से आ सकतें हैं।

जैसे हाल ही में हम सबनें देखा कि कैसे जब लॉकडाउन के चलते देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में लगभग हर बिज़नेस क्षेत्र बुरी तरह से प्रभावित है, ऐसे में ऑनलाइन स्टडी प्लेटफार्म (Unacademy, BYJU’s, Coursera आदि) और ऑनलाइन विडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफार्म (Netflix, Amazon Prime, Hotstar & Disney+ आदि), दो ऐसे क्षेत्र रहें जिनमें नाटकीय रूप से वृद्धि दर्ज की गयी, और इस बात को खुद इन कंपनियों ने भी स्वीकार किया।

लेकिन अब लॉकडाउन के खत्म होने के बाद से जुड़ी नाटकीय परिवर्तनों की संभावनाओं के कयास लगाये जाने लगें हैं। और इस दिशा में एक बिज़नेस क्षेत्र का नाम काफी प्रमुखता से आता है और वह है भारत में तेजी से बढ़ रहा ‘सेल्फ़-ड्राइविंग’ सेवा जगत, जिसमें देश में Zoom, Drivezy और Revv जैसी कंपनियों का नाम काफी लोकप्रिय है। एक तरह कैब सेवा प्रदान Uber और Ola भले भारत में लॉकडाउन के पहले तक काफी तेजी से अपने संचालन का विस्तार करते हुए देश के लोगों के बीच अपनी लोकप्रियता दर्ज कर रहे थे, लेकिन इन्हीं के साथ ही साथ देश में ‘सेल्फ़-ड्राइविंग कार रेंटल’ कल्चर भी तेजी से अपनी जगह बना रहा था। लेकिन स्वाभाविक तौर पर COVID-19 महामारी से बचाव के उपायों के तहत हुए लॉकडाउन की वजह से दोनों ही क्षेत्रों को अपने अपने ढंग से परेशानी का सामना करना पड़ा है।

कौन सा क्षेत्र किस तरह करेगा वापसी?

लेकिन मौजूदा समय में एक महत्वपूर्ण विषय यह भी है कि एक बार लॉकडाउन में बड़ी राहत मिलनें और स्थिति सामान्य होने पर कौन सा क्षेत्र जल्द ही रिकवरी कर पायेगा और इतना ही नहीं बल्कि हो सकने वाले नाटकीय परिवर्तनों के चलते क्या वह अपने वैकल्पिक क्षेत्र को पीछें भी छोड़ देंगें?

जी हाँ! इसी संदर्भ में हमनें देश की कैब इंडस्ट्री और सेल्फ-ड्राइविंग कार रेंटल इंडस्ट्री के बीच कुछ सालों से चली आ रही एक अनकही होड़ का आंकलन करने का फैसला किया, वह भी लॉकडाउन के बाद हो सकने वाली सामान्य स्थितियों के सन्दर्भ में।

दरसल एक और जहाँ लॉकडाउन के तीसरे चरण में ग्रीन और ऑरेंज जोन क्षेत्रों में कैब सेवाओं को कुछ शर्तों के साथ ऑपरेशन शुरू करने की अनुमति दे दी गयी है, वहीं इन थोड़ी राहतों के बाद भी कैब और सेल्फ-ड्राइविंग रेंटल, दोनों ही क्षेत्रों को अभी भी परिचालन को आंशिक रूप से भी स्थिर कर पानें में कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

और जैसे मौजूदा हालात हैं, उसमें लगातार बनी स्थितिरता के चलते किसी भी बिज़नेस जगत को लेकर अभी कोई सटीक अनुमान लगा पाना मुश्किल है। इसलिए हम इन क्षेत्रों का आगामी वक़्त में आ सकने वाली सामान्य स्थिति को ध्यान में रखते हुए आँकलन कर रहें हैं। 

भारत में तेज़ी से क्यों बढ़ी ‘सेल्फ-ड्राइविंग रेंटल कार’ इंडस्ट्री

दरसल Mobility Foresights की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल सेवा असल में ड्राइविंग लाइसेंस धारकों (127 मिलियन) और कार मालिकों (2019 में 22 कार/1000 लोगों में) के बीच के अंतर की संभावनाओं को ही कुरेदती है, और इन गैप में अपने ग्राहकों की तलाश करती है।

इसके साथ ही भारत में ज्यादतर बिकने वाली कॉम्पैक्ट कारों (लंबाई 3.6 मीटर) और 1 लीटर से कम  गैस इंजन द्वारा संचालित कारों के मालिक भी इन सेवाओं में काफी दिलचस्पी दिखातें हैं। दरसल ऐसे लोग इंटरसिटी ट्रिप के लिए एक बड़ा, सुरक्षित और पॉवरफुल वाहन किराए पर लेना पसंद करते हैं। एक आँकडों के मुताबिक भारत में बेची जाने वाली लगभग 28% नई कारें इसी सेगमेंट की हैं।

दरसल साल 2018-19 से इस क्षेत्रीं में काफ़ी तेज वृद्धि और प्रतिद्वंदिता दर्ज की जाने लगी। दिलचस्प यह है कि देश में सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल ऑपरेटरों में निवेश को लेकर ऑटोमोबाइल निर्माताओं ने काफ़ी रूचि दिखाई है।

जहाँ Ford ने 2016 में ही Zoom Car में निवेश कर इस क्षेत्र की संभावनाओं पर मोहर लगा दी थी, वहीँ 2018 में Zoom Car को Mahindra से मिलने वाला निवेश इस कड़ी में अहम साबित। वहीँ Hyundai ने भी इसी साल भारत आधारित Revv में इस संभावनाओं को तलाशा और निवेश किया और 2019 में वापसे Mahindra का Zoom Car में निवेश इस क्षेत्र में प्रतिद्वंदिता को बढ़ानें में अहम कारक रहा।

भारत के किन जगहों में है इन सेवाओं की अधिक डिमांड?

अगर हम फ़िलहाल देश में कार-रेंटल सेवाओं की माँग की बात करें तो आंकड़ों की अनुसार देश में सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल मार्केट दिल्ली एनसीआर, बैंगलोर, मुंबई और हैदराबाद जैसे टियर -1 शहरों में सबसे अधिक है। 2016 तक देश में वीकएंड्स पर करीब 75% रेंटल सेवाओं का इस्तेमाल किया जाता था, हालाँकि चौकानें वाले रूप से मई 2019 तक यह घटकर 64% हो गया है।

पर कई आंकड़ों के मुताबिक भारत में सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल मार्केट 2019 तक करीब $100-$200 मिलियन तक का हो गया व 2020 में जिसके और भी बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रहीं थीं।

भारत में कितना प्रतिस्पर्धी है रेंटल कार मार्केट?

दरसल भारत में सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल मार्केट में कई कंपनियों के प्रवेश के बाद आख़िरकार Zoomcar, Drivezy और Revv जैसी कंपनियां इस क्षेत्र को थोड़ी स्थिरता और मजबूती प्रदान करती नजर आयीं।

इतना ही नहीं इन संभावनाओं के चलते देश की अग्रणी कैब एग्रीगेटर सेवा प्रदाता Ola ने भी सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल मार्केट में प्रवेश का ऐलान कर दिया था, लेकिन Ola ने फ़िलहाल लक्जरी और कॉर्पोरेट लीजिंग सेगमेंट में ही पैर ज़माने का सोचा।

लेकिन खास यह है कि देश के 5-6 मेट्रो शहरों से अपना परिचालन शुरू करने वाली लगभग सभी ऐसी कंपनियां अब देश के छोटे शहरों और यहां तक ​​कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी सेवाओं का विस्तार करन चाह रही हैं।

इस क्षेत्र में जहाँ Zoom Car जैसी कंपनियों ने अधिकतर लाइट बिज़नेस मॉडल को अपनाते हुए टैक्सी ऑपरेटरों, निजी मालिकों से ही कारों को लीज में देने की पेशकश के लिए साझेदारी की, वहीं कई कंपनियों ने सीधे कार निर्माताओं से ही साझेदारी कर इस बाजार को और पहचान दिलाई। लेकिन आपको बता दें की आंकड़ों के मुताबिक निजी मालिकों से ली गई कारें अब तक इन कंपनियों के कुल बेड़े का 10-13% हिस्सा बनाती हैं।

भारत में टॉप 5 सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल कंपनियां;

सोर्स: mobilityforesights.com

लॉकडाउन के बाद की स्थिति कैब सेवा प्रदाताओं के मुकाबलें इन सेल्फ-ड्राइविंग रेंटल कंपनियों को कैसे देगी बढ़त;

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो देश में कैब जगत से जुड़ें ड्राईवर पार्टनर्स में से करीब 60% से अधिक ड्राईवर पार्टनर्स प्रवासी हैं, जो मौजूदा समय में अधिकतर अपनें अपने घरों की ओर निकलने लगें हैं। 

लॉकडाउन के चलतें बनी इन्हीं सब तमाम नयी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दरसल जहाँ स्थिति सामान्य होने के बाद भी कैब इंडस्ट्री प्रवासी कर्मचारियों के वापस घरों की ओर का रुख करने के चलते थोड़ी प्रभावित नजर आ सकती है, वहीँ बात संक्रमण से सुरक्षा के उपायों की करें तो दिन में अधिकतर कैब सेवाओं का उपयोग करने वाले लोग सुरक्षा की दृष्टि से सेल्फ-ड्राइविंग सेवाओं की ओर रुझान करते नजर भी आ सकतें हैं।

दरसल जो लोग दिन में कई बार कैब सेवाओं का इस्तेमाल करने को मजबूर होंगें, उन्हें फ़िलहाल के लिए कार को रेंट पर लेकर अकेले इस्तेमाल करने का विकल्प सुरक्षा के नजरिये से कहीं अधिक पसंद आ सकता है और शायद आगामी समय में हमें ये कंपनियां इसी बिंदु को मार्केटिंग के तौर पर भी इस्तेमाल करती नजर आयें।

दरसल हम ऐसा इसलिए भी कह रहें हैं क्योंकि हाल ही में Zoom जैसी कंपनियों ने अपने सेवा सब्सक्राइबर्स को लॉकडाउन के चलते थोड़ी राहत देने का भी ऐलान किया है। दरसल लॉकडाउन की वजह से ग्राहक इन खरीदी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पा रहें हैं, जिनकें लिए वह पहले से ही भुगतान कर चुकें हैं या करना पड़ रहा है।

इस राहत में मासिक रूप से कार सब्सक्रिप्शन खरीद चुकें ग्राहकों के लिए राहत के कुछ विकल्प प्रदान किये गये हैं, जैसे अप्रैल आदि में पैसे दे चुकें ग्राहकों को मई में मुफ्त सुविधा देना, या फिर आगामी 2 महीनों में ग्राहकों को 50% की छूट देना आदि।

इस बीच हम आपको पूरी जिम्मेदारी से एक बार फिर से बता दें कि Techसंवाद हमेशा से ही संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर ही आगामी संभावनाओं और मौजूदा माहौल को आपके सामने पेश करने पर भरोसा करता है। और इसी विषय पर हमनें बात की देश के सबसे बड़े ‘सेल्फ-ड्राइव कार रेंटल’ स्टार्टअप में से एक Revv के मार्केटिंग विभाग के उपाध्यक्ष, श्री अमित कालिया से और जाना उन्हीं की जुबानी इस क्षेत्र की संभावनाओं और मौजूदा हालतों की कहानी, आप भी सुनिए!

ऐसे ही टेक और बिज़नेस जगत से जुडें कई दिग्गजों से हुए सीधे संवाद को सुनने के लिए आप बने रहिये Techसंवाद के साथ और फॉलो कीजिये Techसंवाद का Facebook, Instagram, Twitter और अन्य सोशल मीडिया पेज, ताकि आप रहें टेक जगत के हर संवाद से अपडेटेड!

डाटा/इमेज सोर्स: mobilityforesights.com & Internet

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नई तकनीकों और विचारों के समायोजन को तलाशता मुसाफ़िर, जिसका मानना है कि उद्यमशीलता और प्रौद्योगिकी मिलकर ही विकास और विस्तार का अवसर प्रदान करतीं हैं | Founder & Editor-In-Chief (TechSamvad)
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