July 2, 2020
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Unilever, Coca Cola और कई अन्य वैश्विक कंपनियों ने Facebook पर अपने विज्ञापन किए बंद

मुख्य रूप से कई वैश्विक ब्रांडों के साथ जुड़कर, उपभोक्ता उत्पादों की प्रमुख कंपनी Unilever ने अनुसार उसने Facebook, Instagram और Twitter पर अमेरिका में नफ़रत फ़ैलाने वाले भाषण के ख़िलाफ़ विज्ञापन बंद करने का फ़ैसला किया है। इस नफ़रत फ़ैलाने वाले भाषण में Facebook की निष्क्रियता साफ़ देखी गई।

Facebook और उसकी कंपनियों के विज्ञापनों को ऊपर उठाने वाली ब्रांडों में से एक Bloomberg के अनुसार Mark Zuckerberg की संपत्ति में करीब $7.2 बिलियन की गिरावट दर्ज़ की गई है और पहले के मुक़ाबले कम हुई है। Facebook के शेयर में शुक्रवार को 8.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज़ की गई ही इस वजह से उनके संपत्ति में गिरावट दर्ज़ की गई है।

Bloomberg के अनुसार शेयर की कीमत में गिरावट की वजह से Facebook के बाज़ार मूल्य में करीब $56 बिलियन की गिरावट दर्ज की गई है और इसी वजह से Zuckerberg की कुल संपत्ति करीब $82.3 बिलियन नीचे चली गई है।

Unilever भी अन्य कंपनियों की तरह ही शामिल है, जिनमें मुख्य रूप से Verizon, Coca-Cola, Ben and Jerry’s, Hershey’s, North Face सहित अन्य कंपनियां शामिल है।

Coca Cola ने शुक्रवार को एक फ़ैसले का ऐलान किया और Coca Cola कंपनी के चेयरमैन और सीईओ James Quincey ने यह कहा कि दुनिया में नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है और न ही सोशल मीडिया पर नस्लवाद के लिए कोई स्थान है। उन्होंने आगे यह भी कहा कि Coca Cola कंपनी वैश्विक स्तर पर सभी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर कम से कम 30 दिनों तक पेड विज्ञापन नहीं करेगी। हम इस समय में अपने विज्ञापन नीतियों को फिर से पुनर्निर्धारित करेंगे और जो भी संशोधन होगा उसे आवश्यक रूप से संशोधित करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों से भी सभी को अधिक जवाबदेही और पारदर्शिता की उम्मीद होती है।

एक सप्ताह पहले संगठनों के एक समूह ने जुलाई 2020 के महीने तक Facebook और Instagram के विज्ञापनों पर खर्चें को रोकने के लिए विज्ञापदाताओं से ‘Stop Hate For Profit’ नामक एक अभियान की शुरुआत की थी।

Facebook पर विज्ञापन के मामले में सभी कंपनियों को लिखे गए एक खुले पत्र में Anti Defamation League के सीईओ और नेशनल डायरेक्टर Jonathan Greenblatt का कहना है कि जब बड़े पैमाने पर घृणा और उत्पीड़न से निपटने की बात आती है तो Facebook इन मामलों में नाकाम ही साबित हुआ है। Facebook का राजस्व $70 बिलियन और आमदनी क़रीब $17 बिलियन है लेकिन वह कर क्या रही है आखिर? उनकी अभद्र भाषा, उकसावे और गलत सूचना नीतियों का यह नतीज़ा है। उनकी उत्पीड़न पीड़ित सेवाएं अपर्याप्त है। उनकी घृणापूर्ण कंटेंट के लिए बनाई हुई विज्ञापन प्लेसमेंट प्रॉक्सिमिटी बहुत ही असंतुलित है। सबसे महत्वपूर्ण है कि उनके नागरिक अधिकार ऑडिट पारदर्शिता रिपोर्ट समुदाय के नागरिक अधिकारों के लिए बिल्कुल भी उपयोगी नहीं है।

इस आलोचना का जवाब देते हुए Mark Zuckerberg ने शुक्रवार को सोशल मीडिया नेटवर्किंग वेबसाइट पर कुछ नई नीतिगत बदलावों का खुलासा भी किया है। इसमें मुख्य रूप से मतदान के बारे में आधिकारिक जानकारी, मतदाता को दबाने पर कार्रवाई और घृणा फ़ैलाने वाले भाषणों का सामना करना शामिल है। अभद्र भाषा की बात करते हुए उन्होंने बताया कि यह प्लेटफ़ॉर्म विज्ञापनों में घृणित कंटेंट की एक बड़े पैमाने को प्रतिबंधित करेगा। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से विज्ञापन के नीतियों को बढ़ा करके किया जाएगा। इससे विशिष्ट जाति, जातीयता, राष्ट्रीय मूल, धार्मिक संबंध, लिंग पहचान और इमिग्रेशन की स्थिति दूसरों कि शारीरिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और उनके अस्तित्व के लिए खतरा न रहें और उन्हें प्रतिबंधित किया जा सकें।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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