August 8, 2020
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अगर ‘ऑनलाइन क्लास’ का विकल्प है तो विदेशी छात्र जाए अपने देश वापस : अमेरिका

सोमवार को United States Immigration and Customs Enforcement (ICE) ने यह घोषणा किया कि वैसे सभी छात्र जो बाहर के देशों से आकर यहां स्टूडेंट वीज़ा पर पढ़ाई कर रहे है उन्हें ऑनलाइन क्लास चलने की स्थिति में अपने अपने देश वापस लौटना पड़ सकता है। इस कदम से न सिर्फ़ देशभर के विभिन्न हिस्सों से आए हुए छात्र छात्राओं को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है बल्कि भारत के भी कई छात्रों को काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

आपको बता दे की यह Student and Exchange Visitor Program (SEVP) मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका की एक संस्था ICE के द्वारा ही संचालित किया जाता है।

ICE ने अपने बयान में कहा है कि गैर आप्रवासी छात्रों को यहां पर रखकर ऑनलाइन माध्यम से पूरा कोर्स करने की अनुमति नहीं दिया गया है। इसके साथ ही इसने अपने बयान में कहा कि अगर छात्र इस परिस्थिति में खुद को देखते है तो उन्हें यहां से बाहर जाना होगा। इसके साथ ही गैर आप्रवासी की स्थिति को कम करने के लिए और इसके मूल्यों को बरकरार रखने के लिए ऐसे वैकल्पिक कदम उठाने होंगे जिसमें कोर्स को छोटा करना और उपयुक्त चिकित्सा अवकाश भी शामिल है।

ICE ने घोषणा की है कि वैसे छात्र जिनके पास गैर अप्रवासी F-1 वीज़ा (स्टूडेंट वीज़ा) और M-1 वीज़ा (नॉन एकेडमिक और वोकेशनल स्टडीज) है और वह अपने अपने क्लास ऑनलाइन तरीके से कर रहे है तो उस परिस्थिति में उन्हें यह रहकर पूरी कोर्स करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

हालांकि वैसे विदेशी छात्र जो ऑनलाइन क्लास और इन पर्सन क्लास दोनों में शामिल हो रहे है उन्हें एक से ज्यादा क्लास और तीन क्रेडिट घंटे ऑनलाइन करने की अनुमति दी जाएगी। ICE ने कहा कि ऐसी परिस्थिति में स्कूल को SEVP को यह प्रमाणित करना होगा कि यह प्रोग्राम पूरी तरह से ऑनलाइन नहीं है और छात्र अपने डिग्री प्रोग्राम को सामान्य रूप से आगे बढ़ाने के लिए एक आवश्यक क्लास भी ऑनलाइन रूप से पूरा कर रहे है।

यूएस डिपार्टमेंट ने यह साफ कर दिया है कि वैसे छात्र जो वर्तमान सेमेस्टर में प्रोग्राम को पूरी तरह से स्कूल में ऑनलाइन पूरा कर रहे है उन्हें वीज़ा जारी नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही यूएस कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन परमिट के द्वारा भी ऐसे छात्रों को यूएस में प्रवेश करने की इजाज़त नहीं देगा।

ICE ने कहा कि वैसे छात्र जो वर्तमान में यूएस के किसी भी स्कूल में किसी भी प्रोग्राम में दाखिला लिए हुए है वह अपने लिए कुछ और उपाय देख सकते है और यहां से बाहर जा सकते है। इसके साथ ही अन्य उपायों में वह अपने स्कूल से दूसरे स्कूल में ट्रांसफर करवा सकते है और विधिवत तरीके से व्यक्तिगत निर्देश के साथ ही यह मुमकिन हो पाएगा। अगर वह ऐसा नहीं करते है तो आने वाले समय में उन्हें इमिग्रेशन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है और यह हटाने की कार्यवाही तक ही सीमित नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार यूएस के केवल 9 प्रतिशत कॉलेज ही पूरी तरह से ऑनलाइन शुरू होने पर विचार कर रही है। बाकी 60 प्रतिशत कॉलेज ऐसे है जो चाह रहे है कि इस महामारी के दौरान सभी छात्र अपने कैंपस लौट आएं। करीब 24 प्रतिशत कॉलेज ऐसे है जो यह चाह रहे है कि वर्तमान परिस्थिति देखते हुए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से क्लास लिया जाए। आपको बताते चले कि वर्तमान परिस्थिति में यूएस इस महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों में पहले स्थान पर है।

हालांकि इस विषय पर अभी सभी कॉलेजों ने निर्णय नहीं लिया है लेकिन ICE की घोषणा के बाद से छात्रों के बीच इसको लेकर चिंता और एक डर पैदा हो गया है। इस महामारी के कारण कॉलेज बंद होने की स्थिति में छात्रों को हॉस्टल खाली करने को भी कहा गया है। कई विदेशी छात्र जो वापस अपने घर लौट आए थे वह अब कॉलेज लौटने की राह ताक रहे है।

विश्व की जानी मानी यूनिवर्सिटी Harvard ने यह घोषणा की है कि कला और विज्ञान फैकल्टी के बचे हुए सेमेस्टर के लिए वर्ष के सभी छात्रों को वापस बुलाने की तैयारी है और इसके साथ अंडरग्रैजुएट कोर्स के 40 प्रतिशत छात्रों को भी कैंपस बुलाने की तैयारी चल रही है। सभी प्रथम वर्ष के छात्रों को वापस फिर घर भेज दिया जाएगा और स्प्रिंग सीजन तक वहां रहकर ही पढ़ाई हो पाएगी।

यूनिवर्सिटी ने सोमवार को पाने बयान में कहा कि हम वाइड छात्रों को भी वापस बुलाने की तैयारी में है जो घर पर रहकर अच्छे से पढ़ाई नहीं कर पा रहे है और उन्हें घर पर पढ़ाई का वातावरण नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही Harvard ने यह भी कहा कि ऑनलाइन क्लास के लिए भी हमलोग ट्यूशन फीस में किसी भी प्रकार का कोई बदलाव नहीं करने जा रहे है।

हालांकि इस विषय पर Harvard के प्रेसिडेंट Larry Bacow ने ICE के फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यह फ़ैसला छात्रों के ध्यान में रखकर नहीं लिया गया है। एक तरह से देखा जाए तो इससे छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने आगे कहा कि हम सभी कॉलेजों के साथ आगे की रणनीति तैयार करेंगे और छात्रों के पढ़ाई के हितों को साथ लेकर आगे बढ़ने की पूरी कोशिश करेंगे।

Princeton University ने आगे कहा कि अंडरग्रैजुएट छात्र कम संख्या में कैंपस में लौटेंगे और प्रथम वर्ष के छात्र और जूनियर कैंपस में लौट सकते है। Princeton ने साल भर के ट्यूशन फीस पर 10 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की है। वहीं Yale ने यह साफ़ तौर पर कहा है कि प्रत्येक सेमेस्टर में चार में से तीन क्लासेज लाइव और कैंपस में रहकर आयोजित की जाएंगी और बाकी बची हुई क्लासेस ऑनलाइन माध्यम से और बाहर रहकर भी पूरी हो सकेगी।

Abhinav Narayan is presently a student of Law from Amity Law School, Noida; and is a vastly experienced candidate in the field of MUNs and youth parliaments. The core branches of Abhinav's expertise lies in Hindi writing, he writes Hindi poems and is a renowned orator. He is currently the President of the Hindi Literary Club, Amity University.
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