August 8, 2020
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offline vs online

Internet की बढ़त को Physical दुनिया के ही Integrated Extension के रूप में क्यों नहीं देखा जा सकता?

दुनिया Online को अपना ही रही थी कि COVID-19 ने इसको दुनिया की मजबूरी ही बना दिया। पिछले एक दशक से क़रीब हर क्षेत्र में ‘इंटरनेटने अपने क़दम रखे, और इसके क़दम पढ़ते ही Online Vs Offline की अनकही दौड़ शुरू हो गई, लेकिन ख़ास ये है कि इतने सालों के बाद भी कोई पुख़्ता सबूत के साथ इस दौर का Result घोषित नहीं कर पाया

दुकानदारों (MSMEs & SMEs)  का सामान Online बिकने लगा है, लेकिन Offline ग्राहक आज भी उनका एक मज़बूत आधार हैं। Marketing में Online Channels बढ़ते जा रहें हैं, लेकिन Print का ग़ुरूर आज भी बरकरार है। आज भी Online Vs Offline मार्केटिंग बजट को बाँटनें में कई कंपनियों के माथे पर लकीर पड़ ही जाती हैं।

सब छोड़िए, यहाँ तक कि सरकारें आज भी Online Services पर क़ानून बनाने आदि को लेकर जद्दोजहद कर रहीं हैं। Online चीज़ें बढ़ रहीं हैं, भीड़ बढ़ रहीं हैं, लेकिन इस भीड़ ने Online Channels को पूरी तरह और साफ़ साफ़ समझ लिया है, इसका दावा शायद ही कोई कर सके।

कहनें का मतलब ये है कि हम इसको Online Vs Offline की दौड़ की तरह ही क्यूँ देख रहें हैं? क्या Internet की ये बढ़त Physical दुनिया का ही Integrated Extension नहीं है? या फिर इसको एक नई ही दुनिया घोषित करना सही होगा? आपकी क्या राय है?

Founder & Editor-In-Chief | Founded in 2017, TechSamvad is the only Media Platform reporting in Technology, Startups, and Business domain in Hindi.
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